सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग भैरूं 25 कच्छप ज्यों कर लीये रे, जीये रे ते जीये रे ॥ ३ ॥ भृंगी कीट समाना रे, ध्याना रे यहु ध्याना रे ॥ 4 ॥ अजा सिंह ज्यों रहिये रे, दादू दर्शन लहिये रे ॥ 5 ॥ ३४1. हरि प्राप्ति दुर्लभ । त्रिताल तहँ मुझ कमीन की कौन चलावै, जाको अजहुँ मुनिजन महल न पावै ॥ टेक ॥ शिव विरंचि नारद यश गावैं, कौन भांति कर निकट बुलावैं ॥ 1 ॥ देवा सकल तेतीसौँ क्रोरि, रहे दरबार ठाड़े कर जोरि ॥ 2 ॥ सिध साधक रहे लयौ लाइ, अजहूँ मोटे महल न पाइ ॥ 3 ॥ सब तैं नीच मैं नाम न जाना, कहै दादू क्यों मिलै सयाना ॥ 4 ॥ ३४२. करूणा विनती । त्रिताल तुम बिन कहु क्यों जीवन मेरा, अजहूँ न देख्या दर्शन तेरा ॥ टेक ॥ होहु दयाल दीन के दाता, तुम पति पूरण सब विधि साचा ॥ 1 ॥ जो तुम करो सोई तुम छाजे, अपने जन को काहे न निवाजे ॥ 2 ॥ अकरन करन ऐसैं अब कीजे, अपनो जान कर दर्शन दीजे ॥ 3 ॥ दादू कहै सुनहु हरि सांई, दर्शन दीजे मिलो गुसांई ॥ 4 ॥ ३४३. उपदेश चेतावनी । पंजाबी त्रिताल कागा रे करंक पर बोलै, खाइ माँस अरु लग ही डोलै ॥ टेक ॥ जा तन को रचि अधिक सँवारा, तो तन ले माटी में डारा ॥ 1 ॥ जा तन देख अधिक नर फूले, सो तन छाड़ि चल्या रे भूले ॥ 2 ॥ जा तन देख मन में गर्वाना, मिल गया माटी तज अभिमाना ॥ 3 ॥ दादू तन की कहा बड़ाई, निमष माँहि माटी मिल जाई ॥ 4 ॥
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