सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 स्मरण नाम विरह दादू जगत सुपना है गया, चिंतामणि जब जाइ । तब ही साचा होत है, आदि अंत उर लाइ ॥ 97 ॥ नांव न आवै तब दुखी, आवै सुख संतोष । दादू सेवक राम का, दूजा हर्ष न शोक ॥ 98 ॥ मिले तो सब सुख पाइये, बिछुरे बहु दुःख होइ । दादू सुख दुःख राम का, दूजा नाहीं कोइ ॥ 99 ॥ दादू हरि का नाम जल, मैं मीन ता माहिं । संगि सदा आनन्द करै, बिछुरत ही मर जाहिं ॥ 100 ॥ दादू राम बिसार कर, जीवैं किहिं आधार । ज्यूं चातक जल बूँद को, करै पुकार पुकार ॥ 101 ॥ हम जीवैं इहि आसरे, सुमिरण के आधार । दादू छिटके हाथ थैं, तो हमको वार न पार ॥ 102 ॥ पतिव्रत निष्काम स्मरण दादू नाम निमित रामहि भजै, भक्ति निमित भजि सोइ । सेवा निमित सांई भजै, सदा सजीवन होइ ॥ 103 ॥ नाम सम्पूर्णता दादू राम रसाइन नित चवै, हरि है हीरा साथ । सो धन मेरे साइयां, अलख खजाना हाथ ॥ 104 ॥ हिरदै राम रहै जा जन के, ताको ऊरा कौण कहै । अठ सिधि, नौ निधि ताके आगे, सनमुख सदा रहै ॥ 105 ॥ वंदित तीनों लोक बापुरा, कैसे दर्श लहै । नाम निसान सकल जग ऊपर, दादू देखत है ॥ 106 ॥ दादू सब जग नीधना, धनवंता नहीं कोइ । सो धनवंता जाणिये, जाके राम पदार्थ होइ ॥ 107 ॥
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