भारतकोश
देवी भागवत महापुराण

देवी भागवत महापुराण

Devi Bhagavata Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished889 पृष्ठ

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श्रीमद्देवीभागवतकी पाठविधि २३


शिखाबन्धन

निम्न मन्त्रसे शिखाका स्पर्श करे—

ॐ ऊर्ध्वकेशि विरूपाक्षि मांसशोणितभोजने।
तिष्ठ देवि शिखामध्ये चामुण्डे चापराजिते॥

भैरवनमस्कार

निम्न मन्त्रसे भैरवजीको नमस्कार करे—

ॐ तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय कल्पान्तदहनोपम।
भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुमर्हसि॥

दुर्गापूजनका संकल्प

हाथमें जल, अक्षत, पुष्प लेकर बोले—

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्य यथोक्तगुण-विशिष्टतिथ्यादौ ॰॰॰॰गोत्रः ॰॰॰॰शर्मा/वर्मा/गुप्तोऽहम् अस्मिन् श्रीमद्देवीभागवतनवाह्नकथायज्ञकर्मणि मम आत्मनः श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं श्रीभगवत्या जगदम्बिकायाः त्रिगुणात्मिकायाः श्रीदुर्गादेव्याः पूजनं करिष्ये। पूजनकर्मणि आत्मनोऽधिकारपूर्वकयोग्यता-सम्पादनार्थं नवार्णेन न्यासान् करिष्ये। संकल्पजल छोड़ दे।

नवार्णमन्त्रके न्यासका संकल्प

अस्य श्रीनवार्णमन्त्रस्य ब्रह्मविष्णुरुद्रा ऋषयः गायत्र्युष्णिगनुष्टुभश्छन्दांसि श्रीमहाकालीमहालक्ष्मी-महासरस्वत्यो देवताः ऐं बीजं ह्रीं शक्तिः क्लीं कीलकम् श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीप्रीत्यर्थे न्यासे पूजायां च विनियोगः।

विनियोग पढ़कर जल गिराये। नीचे लिखे न्यासवाक्योंमेंसे एक-एकका उच्चारण करके दाहिने हाथकी अँगुलियोंसे क्रमशः सिर, मुख, हृदय, गुदा, दोनों चरण और नाभि—इन अंगोंका स्पर्श करे।

ऋष्यादिन्यास

ब्रह्मविष्णुरुद्रऋषिभ्यो नमः शिरसि (सिरका स्पर्श करे)।

गायत्र्युष्णिगनुष्टुप्छन्दोभ्यो नमः मुखे (मुखका स्पर्श करे)।

महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताभ्यो नमः हृदि (हृदयका स्पर्श करे)।

ऐं बीजाय नमः गुह्ये (गुह्यस्थानका स्पर्श करे)।

ह्रीं शक्तये नमः पादयोः (दोनों पैरोंको छुए)।

क्लीं कीलकाय नमः नाभौ (नाभिका स्पर्श करे)।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे—इस मूल मन्त्रसे हाथोंकी शुद्धि करके करन्यास करे।

करन्यास

ॐ ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। (दोनों हाथोंकी तर्जनी अँगुलियोंसे दोनों अँगूठोंका स्पर्श करे)।

ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः। (दोनों हाथोंके अँगूठोंसे दोनों तर्जनी अँगुलियोंका स्पर्श करे)।

ॐ क्लीं मध्यमाभ्यां नमः। (दोनों अँगूठोंसे मध्यमा अँगुलियोंका स्पर्श करे)।

ॐ चामुण्डायै अनामिकाभ्यां नमः। (दोनों अँगूठोंसे अनामिका अँगुलियोंका स्पर्श करे)।

ॐ विच्चे कनिष्ठिकाभ्यां नमः। (कनिष्ठिका अँगुलियोंका स्पर्श करे)।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे करतल-करपृष्ठाभ्यां नमः। (हथेलियों और उनके पृष्ठभागोंका परस्पर स्पर्श करे)।

हृदयादिन्यास

ॐ ऐं हृदयाय नमः (दाहिने हाथकी पाँचों अँगुलियोंसे हृदयका स्पर्श करे)।

ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा (सिरका स्पर्श करे)।

ॐ क्लीं शिखायै वषट् (शिखाका स्पर्श करे)।

ॐ चामुण्डायै कवचाय हुम् (दाहिने हाथकी अँगुलियोंसे बायें कंधेका और बायें हाथकी अँगुलियोंसे दाहिने कंधेका एक साथ स्पर्श करे)।

ॐ विच्चे नेत्रत्रयाय वौषट् (दाहिने हाथकी अँगुलियोंके अग्रभागसे दोनों नेत्रों और ललाटके मध्यभागका स्पर्श करे)।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे अस्त्राय फट् (दाहिने हाथकी तर्जनी तथा मध्यमा अँगुलियोंसे बायें हाथकी हथेलीपर ताली बजाये)।