देवी भागवत महापुराण

देवी भागवत महापुराण
Devi Bhagavata Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished889 पृष्ठ
पृष्ठ 520, कुल 889 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 520
| अ० २२ ] | चतुर्थ स्कन्ध | ५११ |
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| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
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| समुद्रः शन्तनुः प्रोक्तो गङ्गा भार्या मता बुधैः ।<br>देवकस्तु समाख्यातो गन्धर्वपतिरागमे ॥ ३५ | विद्वानोंका मानना है कि समुद्रके अंशसे महाराज शन्तनु तथा गंगाके अंशसे उनकी भार्या उत्पन्न हुई थीं। पुराणप्रसिद्ध गन्धर्वराजके अंशसे महाराज देवक उत्पन्न हुए थे ॥ ३५ ॥ |
| वसुर्भीष्मो विराटस्तु मरुद्गण इति स्मृतः ।<br>अरिष्टस्य सुतो हंसो धृतराष्ट्रः प्रकीर्तितः ॥ ३६ | भीष्मपितामहको वसुका तथा राजा विराटको मरुद्-गणोंका अंशावतार बताया गया है। महाराज धृतराष्ट्र अरिष्टनेमिके पुत्र हंसके अंशसे उत्पन्न कहे गये हैं ॥ ३६ ॥ |
| मरुद्गणः कृपः प्रोक्तः कृतवर्मा तथापरः ।<br>दुर्योधनः कलेरंशः शकुनिं विद्धि द्वापरम् ॥ ३७ | कृपाचार्यको किसी एक मरुद्गणका अंश तथा कृतवर्माको किसी दूसरे मरुद्गणका अंश बताया गया है। [हे राजन्!] दुर्योधनको कलिका अंश तथा शकुनिको द्वापरका अंश समझिये ॥ ३७ ॥ |
| सोमपुत्रः सुवर्चाह्व्यः सोमप्ररुरुदाहृतः ।<br>पावकांशो धृष्टद्युम्नः शिखण्डी राक्षसस्तथा ॥ ३८ | प्रसिद्ध सोमनन्दन सुवर्चा पृथ्वीपर सोमप्ररु नामसे विख्यात हुए। धृष्टद्युम्न अग्नि तथा शिखण्डी राक्षसके अंशसे उत्पन्न हुए ॥ ३८ ॥ |
| सनत्कुमारस्यांशस्तु प्रद्युम्नः परिकीर्तितः ।<br>द्रुपदो वरुणस्यांशो द्रौपदी च रमांशाजा ॥ ३९ | प्रद्युम्न सनत्कुमारके अंश कहे गये हैं। द्रुपद वरुणके अंश थे तथा द्रौपदी साक्षात् लक्ष्मीके अंशसे उत्पन्न थीं ॥ ३९ ॥ |
| द्रौपदीतनयाः पञ्च विश्वेदेवांशजाः स्मृताः ।<br>कुन्तिः सिद्धिर्धृतिर्माद्री मतिर्गान्धारराजजा ॥ ४० | द्रौपदीके पाँचों पुत्र विश्वेदेवके अंशसे उत्पन्न माने गये हैं। कुन्ती सिद्धिके अंशसे, माद्री धृतिके अंशसे तथा गान्धारी मतिके अंशसे उत्पन्न हुई थीं ॥ ४० ॥ |
| कृष्णपत्न्यस्तथा सर्वा देववाराङ्गनाः स्मृताः ।<br>राजानश्च तथा सर्वे असुराः शक्रनोदिताः ॥ ४१ | भगवान् कृष्णकी सभी पत्नियाँ देवताओंकी रमणियोंके अंशसे उत्पन्न कही गयी हैं। इन्द्रके द्वारा भेजे हुए सब दैत्य धरातलपर आकर दुराचारी नरेश बने थे ॥ ४१ ॥ |
| हिरण्यकशिपोरांशः शिशुपाल उदाहृतः ।<br>विप्रचित्तिर्जरासन्धः शल्यः प्रह्लाद इत्यपि ॥ ४२ | शिशुपालको हिरण्यकशिपुका अंश कहा गया है। जरासन्ध विप्रचित्तिका तथा शल्य प्रह्लादका अंशावतार था ॥ ४२ ॥ |
| कालनेमिस्तथा कंसः केशी हयशिरास्तथा ।<br>अरिष्टो बलिपुत्रस्तु ककुद्मी गोकुले हतः ॥ ४३ | कालनेमि कंस हुआ तथा हयशिराको केशीका जन्म प्राप्त हुआ। बलिपुत्र ककुद्मी अरिष्टासुर बना, जो गोकुलमें मारा गया ॥ ४३ ॥ |
| अनुह्लादो धृष्टकेतुर्भगदत्तोऽथ बाष्कलः ।<br>लम्बः प्रलम्बः सञ्जातः खरोऽसौ धेनुकोऽभवत् ॥ ४४ | अनुह्लाद धृष्टकेतु बना और बाष्कल भगदत्तके रूपमें उत्पन्न हुआ। लम्बने प्रलम्बासुरके रूपमें जन्म लिया तथा खर धेनुकासुर हुआ ॥ ४४ ॥ |
| वाराहश्च किशोरश्च दैत्यौ परमदारुणौ ।<br>मल्लौ तावेव सञ्जातौ ख्यातौ चाणूरमुष्टिकौ ॥ ४५ | अत्यन्त भयंकर वाराह और किशोर नामक दोनों दैत्य चाणूर और मुष्टिक नामक पहलवानोंके रूपमें प्रख्यात हुए ॥ ४५ ॥ |