भारतकोश
देवी भागवत महापुराण

देवी भागवत महापुराण

Devi Bhagavata Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished889 पृष्ठ

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॥ श्रीहरिः ॥

विषय-सूची

अध्यायविषयपृष्ठ-संख्याअध्यायविषयपृष्ठ-संख्या
निवेदन...............................................देवीका प्रसन्न होना, भगवान् विष्णुके हयग्रीवावतारकी कथा.........................८५
श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य .......................१३शेषशायी भगवान् विष्णुके कर्णमलसे मधु-कैटभकी उत्पत्ति तथा उन दोनोंका ब्रह्माजीसे युद्धके लिये तत्पर होना......९६
अर्धश्लोकी देवीभागवत ........................१५ब्रह्माजीका भगवान् विष्णु तथा भगवती योगनिद्राकी स्तुति करना .................१००
भवान्यष्टकम् ....................................१७भगवान् विष्णु योगमायाके अधीन क्यों हो गये—ऋषियोंके इस प्रश्नके उत्तरमें सूतजीद्वारा उन्हें आद्याशक्ति भगवतीकी महिमा सुनाना.................................१०६
श्रीश्रीजगद्धात्री [चित्र] ....................१८भगवान् विष्णुका मधु-कैटभसे पाँच हजार वर्षोंतक युद्ध करना, विष्णुद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा मोहित मधु-कैटभका विष्णुद्वारा वध .............११०
श्रीमद्देवीभागवतकी पाठविधि .............१९१०व्यासजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति .....११८
माहात्म्य११बुधके जन्मकी कथा ..........................१२१
सूतजीके द्वारा ऋषियोंके प्रति श्रीमद्देवीभागवतके श्रवणकी महिमाका कथन ...............................................३३१२राजा सुद्युम्नकी इला नामक स्त्रीके रूपमें परिणति, इलाका बुधसे विवाह और पुरूरवाकी उत्पत्ति, भगवतीकी स्तुति करनेसे इलारूपधारी राजा सुद्युम्नकी सायुज्यमुक्ति ................१२८
श्रीमद्देवीभागवतके माहात्म्यके प्रसंगमें स्यमन्तमणिकी कथा ...........................३८१३राजा पुरूरवा और उर्वशीकी कथा .....१३३
श्रीमद्देवीभागवतके माहात्म्यके प्रसंगमें राजा सुद्युम्नकी कथा .........................४५१४व्यासपुत्र शुकदेवके अरणिसे उत्पन्न होनेकी कथा तथा व्यासजीद्वारा उनसे गृहस्थधर्मका वर्णन ...........................१३६
श्रीमद्देवीभागवतके माहात्म्यके प्रसंगमें रेवती नक्षत्रके पतन और पुनः स्थापनकी कथा तथा श्रीमद्देवीभागवतके श्रवणसे राजा दुर्दमको मन्वन्तराधिप-पुत्रकी प्राप्ति.....५११५शुकदेवजीका विवाहके लिये अस्वीकार करना तथा व्यासजीका उनसे श्रीमद्देवी-भागवत पढ़नेके लिये कहना ............१४२
श्रीमद्देवीभागवतपुराणकी श्रवण-विधि, श्रवणकर्ताके लिये पालनीय नियम, श्रवणके फल तथा माहात्म्यका वर्णन .५९१६बालरूपधारी भगवान् विष्णुसे महा-लक्ष्मीका संवाद, व्यासजीका शुकदेवजीसे देवीभागवतप्राप्तिकी परम्परा बताना तथा शुकदेवजीका मिथिला जानेका निश्चय करना .................................१४८
प्रथम स्कन्ध
महर्षि शौनकका सूतजीसे श्रीमद्देवी-भागवतपुराण सुनानेकी प्रार्थना करना...६९
सूतजीद्वारा श्रीमद्देवीभागवतके स्कन्ध, अध्याय तथा श्लोकसंख्याका निरूपण और उसमें प्रतिपादित विषयोंका वर्णन.७१
सूतजीद्वारा पुराणोंके नाम तथा उनकी श्लोकसंख्याका कथन, उपपुराणों तथा प्रत्येक द्वापरयुगके व्यासोंका नाम .......७५
नारदजीद्वारा व्यासजीको देवीकी महिमा बताना .................................७९
भगवती लक्ष्मीके शापसे विष्णुका मस्तक कट जाना, वेदोंद्वारा स्तुति करनेपर