देवी भागवत महापुराण

देवी भागवत महापुराण
Devi Bhagavata Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished889 पृष्ठ
पृष्ठ 6, कुल 889 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 6
॥ श्रीहरिः ॥
विषय-सूची
| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| १ | निवेदन............................................... | ३ | देवीका प्रसन्न होना, भगवान् विष्णुके हयग्रीवावतारकी कथा......................... | ८५ | |
| २ | श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य ....................... | १३ | ६ | शेषशायी भगवान् विष्णुके कर्णमलसे मधु-कैटभकी उत्पत्ति तथा उन दोनोंका ब्रह्माजीसे युद्धके लिये तत्पर होना...... | ९६ |
| ३ | अर्धश्लोकी देवीभागवत ........................ | १५ | ७ | ब्रह्माजीका भगवान् विष्णु तथा भगवती योगनिद्राकी स्तुति करना ................. | १०० |
| ४ | भवान्यष्टकम् .................................... | १७ | ८ | भगवान् विष्णु योगमायाके अधीन क्यों हो गये—ऋषियोंके इस प्रश्नके उत्तरमें सूतजीद्वारा उन्हें आद्याशक्ति भगवतीकी महिमा सुनाना................................. | १०६ |
| ५ | श्रीश्रीजगद्धात्री [चित्र] .................... | १८ | ९ | भगवान् विष्णुका मधु-कैटभसे पाँच हजार वर्षोंतक युद्ध करना, विष्णुद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा मोहित मधु-कैटभका विष्णुद्वारा वध ............. | ११० |
| ६ | श्रीमद्देवीभागवतकी पाठविधि ............. | १९ | १० | व्यासजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति ..... | ११८ |
| माहात्म्य | ११ | बुधके जन्मकी कथा .......................... | १२१ | ||
| १ | सूतजीके द्वारा ऋषियोंके प्रति श्रीमद्देवीभागवतके श्रवणकी महिमाका कथन ............................................... | ३३ | १२ | राजा सुद्युम्नकी इला नामक स्त्रीके रूपमें परिणति, इलाका बुधसे विवाह और पुरूरवाकी उत्पत्ति, भगवतीकी स्तुति करनेसे इलारूपधारी राजा सुद्युम्नकी सायुज्यमुक्ति ................ | १२८ |
| २ | श्रीमद्देवीभागवतके माहात्म्यके प्रसंगमें स्यमन्तमणिकी कथा ........................... | ३८ | १३ | राजा पुरूरवा और उर्वशीकी कथा ..... | १३३ |
| ३ | श्रीमद्देवीभागवतके माहात्म्यके प्रसंगमें राजा सुद्युम्नकी कथा ......................... | ४५ | १४ | व्यासपुत्र शुकदेवके अरणिसे उत्पन्न होनेकी कथा तथा व्यासजीद्वारा उनसे गृहस्थधर्मका वर्णन ........................... | १३६ |
| ४ | श्रीमद्देवीभागवतके माहात्म्यके प्रसंगमें रेवती नक्षत्रके पतन और पुनः स्थापनकी कथा तथा श्रीमद्देवीभागवतके श्रवणसे राजा दुर्दमको मन्वन्तराधिप-पुत्रकी प्राप्ति..... | ५१ | १५ | शुकदेवजीका विवाहके लिये अस्वीकार करना तथा व्यासजीका उनसे श्रीमद्देवी-भागवत पढ़नेके लिये कहना ............ | १४२ |
| ५ | श्रीमद्देवीभागवतपुराणकी श्रवण-विधि, श्रवणकर्ताके लिये पालनीय नियम, श्रवणके फल तथा माहात्म्यका वर्णन . | ५९ | १६ | बालरूपधारी भगवान् विष्णुसे महा-लक्ष्मीका संवाद, व्यासजीका शुकदेवजीसे देवीभागवतप्राप्तिकी परम्परा बताना तथा शुकदेवजीका मिथिला जानेका निश्चय करना ................................. | १४८ |
| प्रथम स्कन्ध | |||||
| १ | महर्षि शौनकका सूतजीसे श्रीमद्देवी-भागवतपुराण सुनानेकी प्रार्थना करना... | ६९ | |||
| २ | सूतजीद्वारा श्रीमद्देवीभागवतके स्कन्ध, अध्याय तथा श्लोकसंख्याका निरूपण और उसमें प्रतिपादित विषयोंका वर्णन. | ७१ | |||
| ३ | सूतजीद्वारा पुराणोंके नाम तथा उनकी श्लोकसंख्याका कथन, उपपुराणों तथा प्रत्येक द्वापरयुगके व्यासोंका नाम ....... | ७५ | |||
| ४ | नारदजीद्वारा व्यासजीको देवीकी महिमा बताना ................................. | ७९ | |||
| ५ | भगवती लक्ष्मीके शापसे विष्णुका मस्तक कट जाना, वेदोंद्वारा स्तुति करनेपर |