भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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११० ] धम्मपद [ १८।११ ( मलं स्त्रिया दुश्चरितं मात्सर्यं ददतो मलम् । मलं वै पापका धर्म्मा अस्मिन् लोके परत्र च ॥८॥ ) २४३-ततो मला मलतरं अविज्जा परमं मलं । एतं मलं पहत्वान निम्मला होथ भिक्खवो ॥६॥ ( ततो मलं मलतरं अविद्या परमं मलम् । एतत् मलं प्रहाय निर्मला भवत भिक्षवः ॥९॥ ) अनुवाद—स्त्रीका मल दुराचार है, कृपणता ( = कजूसी ) दाताका मल है, पाप इस लोक और पर( लोक दोनों )में मल है फिर मलोंमें भी सबसे बडा मल—महामल अविद्या है। हे भिक्षुओ ! इस ( अविद्या ) मलको त्याग कर निर्मल बनो। जेतवन ( चुल्ल ) सारी २४४-सुजीवं अहिरीकेन काकसूरेन धंसिना । पक्खन्दिना पग्गब्भेन संकिलिट्ठेन जीवितं ॥१०॥ ( सुजीवितं अहीकेण काकशूरेण ध्वंसिना । प्रस्कन्दिना प्रगल्भेन संक्लिष्टेन जीवितम् ॥१०॥) अनुवाद—( पापाचारके प्रति ) निर्लज्ज, कौए समान ( स्वार्थमें ) शूर, ( परहित-)विनाशी, पतित, उच्छृंखल और मलिन (पुरुष)का जीवन सुखपूर्वक बीतता ( देखा जाता ) है। जेतवन ( चुल्ल ) सारी २४५-हिरीमता च दुज्जीवं निच्चं सुचिगवेसिना । अलीनेन'प्पगब्भेन सुद्धार्जीवेन पस्सता ॥११॥

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