धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
DevanagariHindipublished213 पृष्ठ
पृष्ठ 170, कुल 213 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 170
२४।२६ ] तण्हावग्गो [ १५९ ३५६-तिणदोसानि खेत्तानि इच्छादोसो अयं पजा । ' तस्मा हि विगतित्छेसु दिन्नं होति महप्फलं ॥२६॥ ( तृणदोषाणि क्षेत्राणि, इच्छादोषेयं प्रजा । तस्माद्धि विगतेच्छेषु दत्तं भवति महाफलम् ॥ २६ ॥ ) अनुवाद—खेतोंका दोष तृण है, इस प्रजाका दोष इच्छा है; इसलिये विगतेच्छ(=इच्छारहित)को देनेमें महाफल होता है । २४-तृष्णावर्ग समाप्त