भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 181, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 181

२६—ब्राह्मणवग्गो जेतवन ( एक बहुत श्रद्धालु ब्राह्मण ) ३८३-छिन्द सोतं परक्कम कामे पनुद ब्राह्मण ।। संखारानं खयं ञत्वा अकतञ्ञूसि ब्राह्मण ! ॥१॥ ( छिन्धि स्रोतः पराक्रम्य कामान् प्रणुद ब्राह्मण ! । संस्काराणां क्षयं ज्ञात्वाऽकृतज्ञोऽसि ब्राह्मण ! ॥१॥ ) अनुवाद—हे ब्राह्मण ! ( तृष्णा रूपी ) स्रोतको छिन्न करदे, पराक्रम कर, ( और ) कामनाओंको भगादे । संस्कृत (=कृत वस्तुओ, ५ उपादानस्कन्धो ) के विनाशको जानकर, तू अकृत (=न कृत, निर्वाण ) को पानेवाला हो जायेगा । जेतवन ( बहुतसे भिक्षु ) ३८४-यदा द्वयेसु धम्मेसु पारगू होति ब्राह्मणो । अथस्स सब्बे संयोगा अत्यं गच्छन्ति जानतो ॥२॥ ( यदा द्वयोर्धर्मयोः पारगो भवति ब्राह्मणः । अथाऽस्य सर्वे संयोगा अस्तं गच्छन्ति जानतः ॥२॥ ) १७० ]