भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 58

८—सहस्सवग्गो वेणुवन तम्बदाठिक (चोरघातक) १००—सहस्समपि चे वाचा अनत्थपदसंहिता । एकं अत्थपदं सेय्यो यं सुत्वा उपसम्मति ॥ १॥ (सहस्रमपि चेद् वाचः अनर्थपदसंहिताः । एकमर्थपदं श्रेयो यच्छ्रुत्वोपशाम्यति ॥ १ ॥) अनुवाद—व्यर्थके पदोंसे युक्त सहस्रों वाक्योंसे भी (वह) सार्थक एक पद श्रेष्ठ है, जिसे सुनकर शान्ति होती है। जेतवन दारुचीरिय (थेर) १०१—सहस्समपि च गाथा अनत्थपदसंहिता । एकं गाथापदं सेय्यो यं सुत्वा उपसम्मति ॥२॥ (सहस्रमपि चेद् गाथा अनर्थपदसंहिताः । एकं गाथापदं श्रेयो यच्छ्रुत्वोपशाम्यति ॥ २ ॥) अनुवाद—व्यर्थके पदोंसे युक्त हज़ार गाथाओंसे भी एक गाथापद श्रेष्ठ है, जिसे सुनकर० । [ ४७