भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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९—पापवग्गो जेतवन ( चूळ ) एकसाटक ( ब्राह्मण ) ११६—अभित्थरेथ कल्याणे पापा चित्तं निवारये । दन्धं हि करोतो पुञ्ञं पापस्मिं रमते मनो ॥ १॥ ( अभित्वरेत कल्याणे पापात् चित्तं निवारयेत् । तन्द्रितं हि कुर्वतः पुण्यं पापे रमते मनः ॥१॥ ) अनुवाद—पुण्य ( कामोंमें ) जल्दी करे, पापसे चित्तको निवारण करे, पुण्यको धीमी गतिसे करनेपर चित्त पापमें रत होने लगता है । जेतवन सेय्यसक ( थेर ) ११७—पापञ्चे पुरिसो कयिरा न तं कयिरा पुनप्पुनं । न तम्हि छन्दं कयिराथ दुक्खो पापस्स उच्चयो ॥२॥ ( पापं चेद् पुरुषः कुर्यात् न तत् कुर्यात् पुनः पुनः । न तस्मिं छन्दं कुर्यात् , दुःखः पापस्य उच्चयः ॥२॥ ) अनुवाद—यदि पुरुष ( कभी ) पापकर डाले, तो उसे पुनः पुनः न करे, उसमें रत न होवे, ( क्योंकि ) पापका संचय दुःख ( का कारण ) होता है । ५४ ]