भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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५६ ] धम्मपद [ ९।७ कि पुण्यका विपाक नहीं होने लगता; जब पुण्यका विपाक होने लगता है, तो पुण्योको देखने लगता है। जेतवन ' असयमी (भिक्षु) १२१—मावमञ्ञेथ पापस्स न मन्तं आगमिस्सति । उदविन्दुनिपातेन उदकुम्भोपि पूरति । बालो पूरति पापस्स थोक-थोकम्पि आचिनं ॥६॥ ( मा ऽ वमन्येत पापं न मां तद् आगमिष्यति । उदविन्दुनिपातेन उदकुम्भोऽपि पूर्यते । बालः पूरयति पापं स्तोकं स्तोकमप्याचिन्वन् ॥ ६ ॥ ) अनुवाद—“वह मेरे पास नहीं आयेगा” ऐसा ( सोच ) पापकी अवहेलना न करे। पानीकी बूंदके गिरनेसे घड़ा भर जाता है ( ऐसे ही ) मूर्ख थोड़ा थोड़ा संचय करते पाप- को भर लेता है। जेतवन विळालपाद ( सेठ ) १२२—मावमन्ञेथ पुञ्ञस्स न मन्तं आगमिस्सति । उदविन्दुनिपातेन उदकुम्भोपि पूरति । धीरो पूरति पुञ्ञस्स थोक-थोकम्पि आचिनं ॥७॥ ( मा ऽ वमन्येत पुण्यं न मां तद् आगमिष्यति । उदविन्दुनिपातेन उदकुम्भो ऽपि पूर्यते । धीरः पूरयति पुण्यं स्तोकं स्तोकमप्याचिन्वन् ॥ ७ ॥ )