ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary
आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished680 पृष्ठ
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'ध्वन्यालोक' में उद्धृत ग्रन्थ और ग्रन्थकार
| आदिकवि ( वाल्मीकि ) ८६, ८९, १८० | रामायण ३७, ३५९, ५७० |
| कालिदास ९४, ३१३, ३६८, | महाभारत ३७, ३५९, ३७८, ५७०, ५७२ |
| भामह ११९, ४९९, | भरत ३३६, ३६५, ३७२, ४००, ४४२, |
| विषमबाणलीला १७८, २८६, ३७८, ५८५ | सर्वसेन ३६८, |
| कादम्बरी २३४, ४०५, | अर्जुनचरित माहाकाव्य ३६८, ४२८, |
| भट्ट उद्भट २५३, २७९, | रत्नावली ३७२, ३७३, |
| भट्ट बाण २६४, | वेणीसंहार ३७२, |
| महर्षि व्यास ३१३, ३८३, | तापसवत्सराज ३७३, |
| हर्षचरित ३२१, | मधुमथनविजय ३७७, |
| हरिविजय ३२१, ३६८, | धर्मकीर्ति ५२०, |
| रामाभ्युदय ३३३, | विनिश्चयटीका ५५५ |
| अमरुककवि ३५५, | कुमारसम्भव ५८६ |
| 'लोचन' व्याख्यान में उद्धृत ग्रन्थ और ग्रन्थकार | |
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| भट्टेन्दुराज २, ८२, १३०, २९७, ३९३, ४९८, ५३१, | कादम्बरी कथासार ३५६ |
| अस्मद्गुरु ७, ४४४, | ग्रन्थकृत् २९, ४१, ४२, ११५, ११७, १६६, २३१, ३४०, ( मूल ० ), ५४९, ५५५ |
| भामह २१, ३४, ११५, ११९, १२०, २०२, २२४, २३५, २४२, ४४२, ४९९, | कारिकाकार १७०, १७३, १७४, ३१२, ३२९, ३४७, ५६६ |
| उद्भट २२, ३४, ११७, २०२, ३३८, | वृत्तिकृत, ˚कार १७१, १७३, २७९, २७१, ३११, ३१२, ३२९, ५५७, ५६६ |
| मनोरथ कवि २९, | रघुवंश ३५७, ३६८, |
| वामन ३४, ११४, | भरतशास्त्र ३६१, |
| आनन्दवर्धनाचार्य ४१, | रामाभ्युदय ३६७, |
| भट्टनायक ५१, ६७, ७२, ८९, ९२, १०३, १८०, १९०, | यशोवर्मन् ३६७, |
| हृदयदर्पण ८८, ९०, १७९, | हरिविजय ३६८, |
| भट्टतौत ९३, ४३४, | अर्जुनचरित ३६८, |
| मुनि ( भरत ) ९४, ३६४, ३७०, ३७१, ३७२, ४१९, ४३०, ४३३, ४४२, ५३०, ५५३, | तापसवत्सराज ३७३, ४०४, ४१९, |
| उत्पल ( परमगुरु ) ९७, | स्वप्नवासवदत्ताख्य नाटक ३७६, |
| ऐतिहासिक १२०, | वत्सराजचरित ३९८, |
| विवरणकृत् १२१, | वेणीसंहार ३९९, |
| सेतु ( सेतुबन्ध ) १३०, | रत्नावली ४२०, |
| भर्तृहरि १३८, १३९, १४०, ६०२ | चन्द्रिकाकार ४३४, ४५१, |
| कालिदास २३४, ४०१, | काव्यकौतुक ४३४, |
| दण्डी ३५४, | काव्यकौतुकविवरण ४३४, |
| भट्टजयन्तक ३५६ | तत्त्वालोक ( आनन्दवर्धनकृत ) |
| भागुरि ४२६ |