भारतकोश
ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary

आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished680 पृष्ठ

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समर्पण कविता और तर्क के विलक्षण सामरस्य प्रातःस्मरणीय गुरुवर श्री स्वामी महेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज [ पूर्वाश्रम के : कवितार्किक चक्रवर्ती श्रीयुत पं० महादेवशास्त्री जी ] को सविनय अन्योन्यस्मिन् स्फुरदभिनवाद्वैतसम्बन्धभावं तत्त्वं साक्षान्मिलितमिव वागर्थयोस्तत्त्वदृष्ट्या । यद्वा साम्यं हिमगिरिसुताशर्वयोर्भूतये न- स्तत् सम्भूयात् किमपि कवितातर्कयोः सामरस्यम् ॥