ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकाशककी ओरसे— हिंदीमें ज्ञानेश्वरीके कई अनुवाद हैं। फिर भी हम इस अनुवादको प्रकाशित कर रहे हैं। अन्य अनुवादोंसे इसकी जो विशेषता है वह विज्ञ पाठक स्वयं अनुभव करेंगे। संत साहित्य सदन एक उद्देश्य लेकर काम कर रहा है। भिन्न भिन्न भाषाओंके संतोंका साहित्य मूलके रूपमें हिंदीमें प्रकाशित करना सदनका एक उद्देश्य है। इसी उद्देश्यसे सदनने ऋग्वेदके २४ सूक्तोंके आचमनके बाद यह दूसरा कदम उठाया है। आशा है हिंदी पाठक इसका स्वागत करेंगे। इस महान ग्रंथके भूमिका लेखक श्री धुंडामहाराज हिंदी भाषा भाषियोंसे अपरिचित हैं। महाराज महाराष्ट्रके एक संतपरिवारके हैं। करीब २५० वर्षोंसे देगलूरकर परिवार ज्ञानेश्वर और ज्ञानेश्वरीके उपासक है। इस अवधिमें इस परिवारके दो महान संत हो गये हैं। महाराष्ट्रके संतचरित्र लेखक श्री महीपति बाबा भी इसी परिवारके हैं। स्वयं भूमिका- लेखक ज्ञानेश्वरीके उपासक हैं। महाराष्ट्रभरमें कीर्तन प्रवचन द्वारा ज्ञानेश्वरीका प्रचार करना अपना स्वधर्म मानते हैं। महाराज, संस्कृत, मराठी, हिंदी तथा तेलगूके विद्वान हैं, आधुनिक वैज्ञानिक विचारोंसे भी पर्याप्त परिचित हैं। आपने तेलगू भाषामें ज्ञानेश्वरीका गद्यानुवाद किया है। अत्यंत व्यस्त कार्यक्रमके होते हुए भी आपने विस्तृत भूमिका लिख दी इसके लिये हम महाराजके कृतज्ञ हैं। वैसे ही इस पुस्तकको अधिकसे अधिक सुंदर बनानेके लिये प्रसाद मासिकके श्री. म. य. जोशीने जो अपने ब्लॉक दिये तथा निर्णयसागर प्रेसके व्यवस्थापक श्री. मोरेने सहयोग दिया उसके लिए उनके भी आभारी हैं। हमारी आगामी पुस्तकें, कन्नडमेंसे दास साहित्यका प्रथम पाद, मराठी ज्ञानेश्वर और उनका साहित्य, ज्ञानेश्वर महाराजका अनुभवामृत, संस्कृतसे उपनिषद संग्रह भाग पहला, और गुजरातीसे नरसी भगत उनका साहित्य और कार्य ये होंगी। प्रकाशक.