दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)
Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ८ ] विषय पृष्ठ-संख्या १०९—दानी और याचकका स्वभाव ११० ११०—प्रेम और बैर ही अनुकूलता और प्रति- कूलतामें हेतु हैं १११ १११—स्मरण और . प्रिय- भाषण ही प्रेमकी निशानी है १११ ११२—स्वार्थ ही अच्छाई- बुराईका मानदण्ड है १११ ११३—संसारमें प्रेममार्गके अधिकारी बिरले ही हैं ११२ ११४—कलियुगमें कपटकी प्रधानता ११२ ११५—कपट अन्ततक नहीं निभता ११३ ११६—कुटिल मनुष्य अपनी कुटिलताको नहीं छोड़ सकता ११३ ११७—स्वभावकी प्रधानता ११४ ११८—सत्सङ्ग और असत्सङ्गका परिणामगत भेद ११५ ११९—सज्जन और दुर्जनका भेद ११६ १२०—अवसरकी प्रधानता ११६ १२१—भलाई करना बिरले ही जानते हैं ११७ विषय पृष्ठ-संख्या १२२—संसारमें हित करने- वाले कम हैं ११७ १२३—वस्तु ही प्रधान है, आधार नहीं. ११८ १२४—प्रीति और बैरकी तीन श्रेणियाँ ११९ १२५—जिसे सज्जन ग्रहण करते हैं, उसे दुर्जन त्याग देते हैं ११९ १२६—प्रकृतिके अनुसार व्यवहारका भेद भी आवश्यक है १२० १२७—अपना आचरण सभी- को अच्छा लगता है १२० १२८—भाग्यवान् कौन है ? १२० १२९—साधुजन किसकी सराहना करते हैं ? १२१ १३०—सङ्गकी महिमा १२१ १३१—मार्गभेदसे फलभेद १२४ १३२—भलेके भला ही हो, यह नियम नहीं है १२४ १३३—विवेककी आवश्यकता १२४ १३४—कभी-कभी भलेको बुराई भी मिल जाती है १२५ १३५—सज्जन और दुर्जनकी परीक्षाके भिन्न-भिन्न प्रकार १२६