भारतकोश
दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Drig Drishya Viveka Hindi

स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished34 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 34 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 22

दृग्दृश्य विवेक Drig Drishya Vivek


२०

अस्ति भाति प्रियं रूपं
नाम चेत्यंशपंचकम्।
आद्यत्रयं ब्रह्मरूपं
जगद्रूपं ततो द्वयम्॥

जगत् का प्रत्येक विषय पांच अंशों से युक्त होता है। ये अस्ति (होना), भाति (भासित होना), प्रियता, नाम तथा रूप है। इसमें प्रथम तीन ब्रह्मरूप हैं, और शेष दो जगद्रूप हैं।

Every entity has five characteristics, viz., existence, effulgence, lovability, form and name. Of these, the first three are reflection of Brahman, and the next two to the creation.


20