गान्धर्व तन्त्र (शैव-शाक्त आगम - मन्त्र-रहस्य, यन्त्र एवं देवतोपासना सटीक)
Gandharva Tantra with Hindi Commentary
शिव-पार्वती संवाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंThe mantra of the first is अंआंइंईंउंऊंऋंॠंऌंॡंएंऐंओंऔंअंअः डां डीं डमलवस्यूं डाकिन्यै नमो डाकिनि त्वग्धातुगते चतुष्षष्टिलक्षकोटि- योगिनीस्वामिनि सर्वसत्त्ववशंकरी आज्ञां मे देहि मम विच्चे. The mantra of the second is कंखंगंघंङंचंछंजंझंञंटठ रां रीं रमलवस्यूं राकिन्यै नमो राकिनि असृग्धातुगते द्वात्रिंशल्लक्षकोटियोगिनीस्वामिनि सर्वसत्त्ववशंकरी आज्ञां मे देहि मम विच्चे The mantra of the third is डंढंणं तंथंदंधनं पं फं लां लीं लमलवस्यूं लाकिन्यै नमो लाकिनि मांसधातुगते षोडशलक्षकोटियोगिनीस्वामिनि सर्वसत्त्ववशंकरी आज्ञां मे देहि मम विच्चे The mantra of the fourth is बंभंमंयरंलं कां कीं कममलवस्यू काकिन्यै नम काकिनि मेदोधातुगते अष्टलक्षकोटियोगिनीस्वामिनि सर्व- सत्त्ववशंकरी आज्ञां मे देहि मम विच्चे The mantra of the fifth is वं शं षं सं शां शीं शमलवस्यू शाकिन्यै नम शाकिनि अस्थिधातुगते चतुर्लक्षकोटियोगिनीस्वामिनि सर्वसत्त्व- वशंकरी आज्ञा मे देहि मम विच्चे The mantra of the sixth is हं क्षं हां हीं हमलवरयूं हाकिन्यै नमो हाकिनि मज्जाधातुगते द्विलक्षकोटियोगिनीस्वामिनि सर्वसत्त्ववशंकरी आज्ञां मे देहि मम विच्चे The mantra of the seventh is अंआंइंईंउंऊंऋंॠंऌंॡंएंऐंओंऔंअंअः कंखंगंघंङंचंछंजंझंञंटठडंढंणंतंथंदंधनं पफंबंभमंयरंलवशषसंहंक्ष यां यी यमलवरयूं याकिन्यै नमो याकिनि शुक्रधातुगते दशकोटियोगिनीस्वामिनि सर्वसत्त्ववशंकरी आज्ञां मे देहि मम विच्चे Rāśi Nyāsa Like the two previous Nyāsas the above Nyāsa also is prescribed in the table as given below -
| Letters / Seat | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Letters | अ आं इं ईं | उं ऊं ऋं | ॠं ऌं ॡं | एं ऐं | ओं औं | अं अः शं षं सं हं | कं खं गं घं ङं | चं छं जं झं ञं | टं ठं डं ढं णं | तं थं दं धं न | पं फं बं भं म | यं रं लं वं क्षं |
| Seat | Right ankle | Right knee | Right testicle | Belly rt. side | Right shoulder | Right side head | Left side head | Left shoulder | Left side belly | Left testicle | Left knee | Left ankle |