भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( १३ ) इसी प्रकार आठ वसु, मुनि, गौ, मनु, पशु, नदी, समुद्र, यज्ञ, वृक्ष, पक्षियोंके समूह ॥ २६ ॥ तथैकविंशतिः स्वर्गा नागाः सप्त वनानि च ॥ मनुष्याःपर्वताःसाध्याःसिद्धा रक्षोगणास्तथा २७ इक्कीस स्वर्ग, सात नाग, वन मनुष्य पर्वत साध्य सिद्ध राक्षस इत्यादिक सब मुझसे हुए हैं ॥ २७ ॥ अहं साक्षी जगच्चक्षुरलिप्तः सर्वकर्मभिः ॥ अविकारोऽप्रमेयोऽहमव्यक्तो विश्वगोऽव्ययः २८ मैंही सबका साक्षी हूं तथा सब जगत्का नेत्र, सब कर्मोंसे अलिप्तहूं निर्विकार, अप्रमेय अर्थात् प्रमाणों द्वाराभी जाननेमें नहीं आता, अव्यक्त, सम्पूर्ण जगत्में व्याप्त और अविनाशी हूं ॥ २८ ॥ अहमेव परं ब्रह्माव्ययानन्दात्मकं नृप ॥ मोहयत्यखिलान्माया श्रेष्ठान्मम नरानमूनू॥२९ हे राजन् ! मैंही परब्रह्म अव्यय आनन्दस्वरूप हूं मेरी माया सम्पूर्ण जगत्‌को तथा श्रेष्ठ पुरुषोंकोभी मोहित करती है ॥२९॥ सर्वदा षड्विकारेषु तानियं योजयेद्भृशम् ॥ हित्वाजापटलं जन्तुरनेकैर्जन्मभिः शनैः ॥३०॥