भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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(४०) गणेशगीता अ० ३. अहमेव परो ब्रह्मा महारुद्रोऽहमेव च ॥ अहमेव जगत्सर्वं स्थावरं जंगमं च यत् ॥ ८ ॥ मैं ही श्रेष्ठब्रह्मा हूं, मैंही महारुद्र हूं, मैं ही स्थावर जंगमरूप सम्पूर्ण जगत हूं ॥ ८ ॥ अजोऽव्ययोऽहंभूतात्माऽनादिरीश्वर एव च ॥ आस्थाय त्रिगुणां मायां भवामि बहुयोनिषु ९॥ यद्यपि मैं अजन्मा अविनाशी अनादि ईश्वरहूं परन्तु त्रिगु- णात्मक मायामें स्थित होकर अनेक अवतार धारण करताहूं ९ अधर्मोपचयो धर्मापचयो हि यदा भवेत् ॥ साधूनसंरक्षितुं दुष्टांस्ताडितुं सम्भवाम्यहम् १०॥ जिस समय अधर्मकी वृद्धि और धर्मकी हानि होती है, उस समय साधुओंकी रक्षा और दुष्टोंके मारनेको मैं अवतार लेता हूं ॥ १० ॥ उच्छिद्याधर्मनिचयं धर्मं संस्थापयामि च ॥ हन्मि दुष्टांश्च दैत्यांश्च नानालीलाकरो मुदा ११ अधर्मके समूहको नष्टकर धर्मका स्थापन करताहूं और अनेक प्रकारकी लीलाकर आनंदसे दुष्ट दैत्योंका वध करताहूं॥११॥