गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (५९) अन्तर्निष्ठोऽन्तःप्रकाशोऽन्तःसुखोऽन्तरतिर्लभेत् असंदिग्धोऽक्षयं ब्रह्म सर्वभूतहितार्थकृत् ॥२४॥ जिनके हृदयमें भक्ति है ज्ञानसे जिनके सब संदेह मिटकर प्रकाश होगया है, जिसे कोई संदेह नहीं, जो सब प्राणियोंका हित करता है, वही अक्षय ब्रह्मको प्राप्त करता है ॥ २४ ॥ जेतारःषड्रिपूणां ये शमिनो दमिनस्तथा ॥ तेषां समंततो ब्रह्म स्वात्मज्ञानां विभात्यहो२५॥ जो कामक्रोधादि छहों शत्रुओंको जीत चुके हैं, जो शम और जितेन्द्रियपनमें सावधान हैं, उन आत्मज्ञानियोंको समता बुद्धिके कारण ब्रह्मकी प्राप्ति होती है ॥ २५ ॥ आसनेषु समासीनस्त्यक्त्वेमान्विषयान्बहिः ॥ संस्तभ्य भ्रुकुटीमास्ते प्राणायामपरायणः ॥२६ इन सब बाह्य विषयोंको त्यागकर एकान्तमें आसनमें स्थितहो,दृष्टिको भोहके मध्यमें स्थापनकर प्राणायाम करै२६॥ प्राणायामं तु संरोधं प्राणापानसमुद्भवम् ॥ वदन्ति मुनयस्तं च त्रिधाभूतं विपश्चितः॥२७॥ प्राण और अपान वायुके रोकनेको प्राणायाम कहते हैं,