भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

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ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ कल्याण यतो वेदवाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणन्ति। परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ वर्ष ९५ गोरखपुर, सौर माघ, वि० सं० २०७७, श्रीकृष्ण-सं० ५२४६, जनवरी २०२१ ई० संख्या १ पूर्ण संख्या ११३० अष्टगणपतिस्थान-स्मरण स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम्। बल्लालं मुरुडं विनायकमढं चिन्तामणिं थेवरम्॥ लेह्याद्रिं गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरम्। ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम्॥ गजके समान मुखवाले गणोंके नायक (श्रीगणेशजी) हमारा कल्याण करें। १. मोरेश्वर (मोरेगाँवके मयूरेश्वर), २. सिद्धिदम् (सिद्धटेकके सिद्धिविनायक), ३. बल्लाल (पालीके बल्लालेश्वर), ४. मढ़के विनायक (मढ़ अर्थात् महड़के वरदविनायक), ५. थेवरके चिन्तामणि (थेवर अर्थात् थेऊरके चिन्तामणि), ६. सुन्दर वर देनेवाले लेह्याद्रिके गिरिजात्मज, ७. ओझरके विघ्नेश्वर, ८. रांजणगाँवमें स्थित (महा) गणपति हमारा सदा मंगल करें। Kalyana Visheshank 2021_Section_2_1_Front