भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

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पृष्ठ 25

"श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" 'श्रीराधामाधव-अङ्क' 'श्रीराधामाधव-अङ्क' 'श्रीराधामाधव-अङ्क' 'श्रीराधामाधव-अङ्क' स्मरण-स्तवन "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" 'श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क" "श्रीराधामाधव-अङ्क"

वैदिक गणेश-स्तवन

गणानां त्वा गणपतिँ हवामहे प्रियाणां त्वा | हे परमदेव गणेशजी! समस्त गणोंके अधिपति एवं प्रियपतिँ हवामहे निधीनां त्वा निधिपतिँ | प्रिय पदार्थों-प्राणियोंके पालक और समस्त सुखनिधियोंके हवामहे वसो मम। आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि | निधिपति! आपका हम आवाहन करते हैं। आप गर्भधम्॥ [शु०यजु० २३।१९] | सृष्टिको उत्पन्न करनेवाले हैं, हिरण्यगर्भको धारण | करनेवाले अर्थात् संसारको अपने-आपमें धारण करनेवाली | प्रकृतिके भी स्वामी हैं, आपको हम प्राप्त हों।

नि षु सीद गणपते गणेषु त्वामाहुर्विप्रतमं | हे गणपते! आप स्तुति करनेवाले हमलोगोंके कवीनाम्। न ऋते त्वत्क्रियते किं चनारे महामर्कं | मध्यमें भली प्रकार स्थित होइये। आपको क्रान्तदर्शी मघवञ्चित्रमर्च॥ [ऋक्० १०।११२।९] | कवियोंमें अतिशय बुद्धिमान्-सर्वज्ञ कहा जाता है। | आपके बिना कोई भी शुभाशुभ कार्य आरम्भ नहीं | किया जाता। (इसलिये) हे भगवन् (मघवन्)! ऋद्धि- | सिद्धिके अधिष्ठाता देव! हमारी इस पूजनीय प्रार्थनाको | स्वीकार कीजिये।

गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं | हे अपने गणोंमें गणपति (देव), क्रान्तदर्शियों कवीनामुपमश्रवस्तमम्। ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां | (कवियों)-में श्रेष्ठ कवि, शिवा-शिवके प्रिय ज्येष्ठ ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥ | पुत्र, अतिशय भोग और सुख आदिके दाता! हम [ऋक्० २।२३।१] | आपका आवाहन करते हैं। हमारी स्तुतियोंको सुनते | हुए पालनकर्ताके रूपमें आप इस सदनमें आसीन हों।

नमो गणेश्भ्यो गणपतिभ्यश्च वो नमो नमो | देवानुचर गण-विशेषोंको, विश्वनाथ महाकालेश्वर व्रातेभ्यो व्रातपतिभ्यश्च वो नमो नमो | आदिकी तरह पीठभेदसे विभिन्न गणपतियोंको, संघोंको, गृत्सेभ्यो गृत्सपतिभ्यश्च वो नमो नमो | संघपतियोंको, बुद्धिशालियोंको, बुद्धिशालियोंके परिपालन विरूपेभ्यो विश्वरूपेभ्यश्च वो नमः॥ | करनेवाले उनके स्वामियोंको, दिगम्बर-परमहंस- [शुक्लयजु० १६।२५] | जटिलादि चतुर्थश्रमियोंको तथा सकलात्मदर्शियोंको | नमस्कार है।

ॐ तत्कराटाय विद्महे हस्तिमुखाय धीमहि। | उन कराट (सूँड़को घुमानेवाले) भगवान् गणपतिको तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥ [कृ०यजु० मैत्र० २।९।१६] | हम जानते हैं, गजवदनका हम ध्यान करते हैं, वे दन्ती | सन्मार्गपर चलनेके लिये हमें प्रेरित करें।

नमो व्रातपतये नमो गणपतये नमः | व्रातपति (गणोंके स्वामी)-को नमस्कार, गणपतिको प्रमथपतये नमस्तेऽस्तु लम्बोदरायैकदन्ताय | नमस्कार, प्रमथपतिको नमस्कार; लम्बोदर, एकदन्त, विघ्ननाशिने शिवसुताय श्रीवरदमूर्तये नमः॥ | विघ्ननाशक, शिवतनय श्रीवरदमूर्तिको नमस्कार है। [कृ० यजुर्वेदीय गणपत्यथर्वशीर्ष १०] |