भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 656 में से

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पृष्ठ 29

अङ्क ] * सर्वकामप्रद श्रीगणेशाष्टक * २७ 卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐 यतः पुत्रसम्पद् यतो वाञ्छितार्थो यतोऽभक्तविघ्नास्तथानेकरूपाः। यतः शोकमोहौ यतः काम एव सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ६ ॥ यतोऽनन्तशक्तिः स शेषो बभूव धराधारणेऽनेकरूपे च शक्तः। यतोऽनेकधा स्वर्गलोका हि नाना सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ७॥ यतो वेदवाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणन्ति। परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥८॥ श्रीगणेश उवाच पुनरूचे गणाधीशः स्तोत्रमेतत्पठेन्नरः। त्रिसन्ध्यं त्रिदिनं तस्य सर्वं कार्यं भविष्यति ॥ ९ ॥ यो जपेदष्टदिवसं श्लोकाष्टकमिदं शुभम्। अष्टवारं चतुर्थ्यां तु सोऽष्टसिद्धीरवाप्नुयात् ॥ १०॥ यः पठेन्मासमात्रं तु दशवारं दिने दिने। स मोचयेद् बन्धगतं राजवध्यं न संशयः ॥ ११ ॥ विद्याकामो लभेद्विद्यां पुत्रार्थी पुत्रमाप्नुयात्। वाञ्छिताँल्लभते सर्वानेकविंशतिवारतः ॥ १२ ॥ यो जपेत् परया भक्त्या गजाननपरो नरः। एवमुक्त्वा ततो देवश्चान्तर्धानं गतः प्रभुः ॥ १३॥ ॥ इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखण्डे श्रीगणेशाष्टकं सम्पूर्णम् ॥ जिनसे पुत्र-सम्पत्ति सुलभ होती है; जिनसे मनोवांछित अर्थ सिद्ध होता है; जिनसे अभक्तोंको अनेक प्रकारके विघ्न प्राप्त होते हैं तथा जिनसे शोक, मोह और काम प्राप्त होते हैं, उन गणेशका हम सदा नमन एवं भजन करते हैं॥६॥ जिनसे अनन्त शक्तिसम्पन्न सुप्रसिद्ध शेषनाग प्रकट हुए; जो इस पृथ्वीको धारण करने एवं अनेक रूप ग्रहण करनेमें समर्थ हैं; जिनसे अनेक प्रकारके अनेक स्वर्गलोक प्रकट हुए हैं, उन गणेशका हम सदा ही नमन एवं भजन करते हैं ॥७॥ जिनके विषयमें वेदवाणी कुण्ठित है; जहाँ मनकी भी पहुँच नहीं है तथा श्रुति सदा सावधान रहकर 'नेति-नेति'- इन शब्दोंद्वारा जिनका वर्णन करती है; जो सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्म हैं, उन गणेशका हम सदा ही नमन एवं भजन करते हैं ॥८॥ श्रीगणेशजी बोले-जो मनुष्य तीन दिनोंतक तीनों संध्याओंके समय इस स्तोत्रका पाठ करेगा, उसके सारे कार्य सिद्ध हो जायँगे ॥ ९ ॥ जो आठ दिनोंतक इन आठ श्लोकोंका एक बार पाठ करेगा और चतुर्थी तिथिको आठ बार इस स्तोत्रको पढ़ेगा, वह आठों सिद्धियोंको प्राप्त कर लेगा ॥ १० ॥ जो एक मासतक प्रतिदिन दस-दस बार इस स्तोत्रका पाठ करेगा, वह कारागारमें बँधे हुए तथा राजाके द्वारा वध-दण्ड पानेवाले कैदीको भी छुड़ा लेगा, इसमें संशय नहीं है ॥ ११ ॥ इस स्तोत्रका इक्कीस बार पाठ करनेसे विद्यार्थी विद्याको, पुत्रार्थी पुत्रको तथा कामार्थी समस्त मनोवांछित कामनाओंको प्राप्त कर लेता है ॥ १२ ॥ जो मनुष्य पराभक्तिसे इस स्तोत्रका जप करता है, वह गजाननका परम भक्त हो जाता है-ऐसा कहकर भगवान् गणेश वहीं अन्तर्धान हो गये ॥ १३ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणमें श्रीगणेशाष्टक सम्पूर्ण हुआ ॥