श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)
Ganesha Purana Gita Press Special Edition
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंदुर्गति-नाशिनि दुर्गा जय जय, काल-विनाशिनि काली जय जय। उमा-रमा-ब्रह्माणी जय जय, राधा-सीता-रुक्मिणि जय जय॥ साम्ब सदाशिव, साम्ब सदाशिव, साम्ब सदाशिव, जय शंकर। हर हर शंकर दुखहर सुखकर अघ-तम-हर हर हर शंकर॥ हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥ जय जय दुर्गा, जय मा तारा। जय गणेश जय शुभ-आगारा॥ जयति शिवाशिव जानकिराम। गौरीशंकर सीताराम॥ जय रघुनन्दन जय सियाराम। व्रज-गोपी-प्रिय राधेश्याम॥ रघुपति राघव राजाराम। पतितपावन सीताराम॥ (संस्करण २,००,०००) ═वार्षिक सुभाषित═ ● सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्म श्रीगणेश ● यतो वेदवाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणन्ति। परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ [श्रीगणेशपुराण, उपासनाखण्ड ९९। ५२] जिनके विषयमें वेदवाणी कुण्ठित है; जहाँ मनकी भी पहुँच नहीं है तथा श्रुति सदा सावधान रहकर 'नेति-नेति'—इन शब्दोंद्वारा जिनका वर्णन करती है; जो सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्म हैं, उन गणेशका हम सदा ही नमन एवं भजन करते हैं।
- कृपया नियम अन्तिम पृष्ठपर देखें। एकवर्षीय शुल्क | जय पावक रवि चन्द्र जयति जय। सत्-चित्-आनंद भूमा जय जय॥ | पंचवर्षीय शुल्क ₹ 250 | जय जय विश्वरूप हरि जय। जय हर अखिलात्मन् जय जय॥ | ₹ 1250 जय विराद् जय जगत्पते। गौरीपति जय रमापते॥ विदेशमें Air Mail } वार्षिक US$ 50 (₹ 3,000) { Us Cheque Collection शुल्क } पंचवर्षीय US$ 250 (₹ 15,000) { Charges 6$ Extra संस्थापक — ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका आदिसम्पादक — नित्यलीलालीन भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार सम्पादक — राधेश्याम खेमका, सहसम्पादक — डॉ० प्रेमप्रकाश लक्कड़ केशोराम अग्रवालद्वारा गोबिन्दभवन-कार्यालय के लिये गीताप्रेस, गोरखपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित website : gitapress.org | e-mail : kalyan@gitapress.org | ✆ 09235400242 / 244 सदस्यता-शुल्क—व्यवस्थापक—'कल्याण-कार्यालय', पो० गीताप्रेस—२७३००५, गोरखपुर को भेजें। Online सदस्यता हेतु gitapress.org पर Kalyan या Kalyan Subscription option पर click करें। अब 'कल्याण' के मासिक अङ्क gitapress.org अथवा book.gitapress.org पर निःशुल्क पढ़ें।