श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)
Ganesha Purana Gita Press Special Edition
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 653, कुल 656 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीहरिः ॥ 'कल्याण' का उद्देश्य और इसके नियम भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, धर्म और सदाचारसमन्वित लेखोंद्वारा जन-जनको कल्याण-पथ (आत्मोद्धारके सुमार्ग)-पर अग्रसरित करनेकी प्रेरणा देना इसका एकमात्र उद्देश्य है। नियम—भगवद्भक्ति, ज्ञान, वैराग्यादि प्रेरणाप्रद एवं कल्याण-मार्गमें सहायक अध्यात्मविषयक, व्यक्तिगत आक्षेपरहित लेखोंके अतिरिक्त अन्य विषयोंके लेख 'कल्याण' में प्रकाशित नहीं किये जाते। लेखोंको घटाने-बढ़ाने और छापने-न-छापनेका अधिकार सम्पादकको है। अमुद्रित लेख बिना माँगे लौटाये नहीं जाते। लेखोंमें प्रकाशित मतके लिये सम्पादक उत्तरदायी नहीं है। १-'कल्याण' का नया वर्ष जनवरीसे आरम्भ होकर दिसम्बरतक रहता है, अतः ग्राहक जनवरीसे ही बनाये जाते हैं। वर्षके मध्यमें बननेवाले ग्राहकोंको जनवरीका विशेषाङ्क एवं अन्य उपलब्ध मासिक अङ्क दिये जाते हैं। २-वार्षिक सदस्यता-शुल्क—भारतमें ₹250, विदेशमें हवाई डाकसे भेजनेके लिये US$ 50 (₹3000) (चेक कलेक्शनके लिये US$ 6 अतिरिक्त)। पंचवर्षीय शुल्क—भारतमें ₹1250, विदेशमें हवाई डाकसे भेजनेके लिये US$ 250 (₹15000) (चेक कलेक्शनके लिये US$ 6 अतिरिक्त)। डाकखर्च आदिमें अप्रत्याशित वृद्धि होनेपर पंचवर्षीय ग्राहकोंद्वारा अतिरिक्त राशि भी देय हो सकती है। ३-समयसे सदस्यता-शुल्क प्राप्त न होनेपर आगामी वर्षका विशेषाङ्क वी०पी०पी०से भेजा जाता है। इसपर डाकशुल्कका ₹10 अतिरिक्त देय होता है। ४-जनवरीका विशेषाङ्क (वर्षका प्रथम अङ्क) रजिस्ट्री/वी०पी०पी०से तथा फरवरीसे दिसम्बरतकके अङ्क साधारण डाकसे भेजे जाते हैं। ५-वार्षिक शुल्क ₹250 के अतिरिक्त ₹200 भेजनेसे फरवरीसे दिसम्बरतकके अंक रजिस्टर्ड डाकसे भेजे जाते हैं। ६-पत्र-व्यवहारमें 'ग्राहक-संख्या' एवं मोबाइल नम्बर अवश्य लिखा जाना चाहिये और पता बदलनेकी सूचनामें ग्राहक-संख्या, पिनकोडसहित पुराना और नया पता लिखना चाहिये। ७-'कल्याण' में व्यवसायियोंके विज्ञापन किसी भी स्थितिमें प्रकाशित नहीं किये जाते। व्यवस्थापक-'कल्याण', पत्रालय-गीताप्रेस-२७३००५ (गोरखपुर) गीताप्रेसके दो महत्त्वपूर्ण प्रकाशन महाभारत—सटीक [छः खण्डोंमें सेट] (कोड 728)—महाभारत हिन्दू-संस्कृतिका महान् ग्रन्थ है। इसे पंचम वेद भी कहा जाता है। यह भारतीय धर्म-दर्शनके गूढ़ रहस्योंका अनुपम भण्डार है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें भगवान् श्रीकृष्णके गुण-गौरवका गान, उपनिषदोंका सार तथा इतिहास- पुराणोंका आशय है। मूल्य ₹2700 मानस-पीयूष [सात खण्डोंमें सेट] (कोड 86)—महात्मा श्रीअञ्जनीनन्दन शरणके द्वारा सम्पादित यह ग्रन्थ श्रीरामचरितमानसकी सबसे बृहत् टीका है। यह महान् ग्रन्थ ख्यातिलब्ध रामायणियों, उत्कृष्ट विचारकों, तपोनिष्ठ महात्माओं एवं आधुनिक मानसविज्ञोंकी एक साथ व्याख्याओंका अनुपम संग्रह है। मूल्य ₹2450