गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकाण्ड ] सामुद्रिक शास्त्रके अनुसार स्त्री-पुरुषके शुभाशुभ लक्षण १०५
राज्याभिषेक और अग्निकार्य सोमवारको प्रशस्त माना गया है। सोमवारमें लिपाईका कार्य एवं गृहका शुभारम्भ करना श्रेयस्कर है। मंगलवारको सेनापतिका पद-भार वहन करना, शौर्य, पराक्रमका कार्य तथा शस्त्राभ्यासका प्रारम्भ करना शुभ है। बुधके दिन किसी कार्यकी सिद्धिके लिये प्रयत्न करना, मन्त्रणा करना और यात्रा करना सफलतादायक माना गया है। बृहस्पतिवारको वेदपाठ, देवपूजा, वस्त्र तथा अलंकारादि धारणके कार्य करने चाहिये। शुक्रवारको कन्यादान, गजारोहण तथा स्त्रीसहवास उचित है। शनिवारको गृहारम्भ, गृहप्रवेश और गजबन्धनके कार्य शुभ माने गये हैं। (अध्याय ६२)
सामुद्रिक शास्त्रके अनुसार स्त्री-पुरुषके शुभाशुभ लक्षण, मस्तक एवं हस्तरेखासे आयुका परिज्ञान
श्रीहरिने कहा— हे शिव ! अब मैं स्त्री-पुरुषके लक्षणोंका वर्णन संक्षेपमें कर रहा हूँ, आप सुनें।
जिनके हाथ-पाँवके तल पसीनेसे रहित हों, कमलके भीतरी भागकी तरह मृदु एवं रक्त हों, अँगुलियाँ सटी हुई हों, नाखून ताँबेके वर्णके समान थोड़े रक्त हों, पाँव सुन्दर गुल्फवाले, नसोंसे रहित और कूर्मके समान उन्नत हों, उन्हें नृपश्रेष्ठ समझना चाहिये।
रूक्ष एवं थोड़ा पीलापन लिये, श्वेत नखवाले, वक्र तथा नसोंसे भरे हुए और विरल अँगुलियोंसे युक्त शूर्पाकार चरणोंवाले मनुष्य दुःखी एवं दरिद्र होते हैं।
अल्परोमसे युक्त, गलशुण्डके समान सुन्दर जंघाप्रदेश तथा एक-एक रोमसे भरे हुए रोमकूपोंवाला शरीर राजाओं और महात्माओंका माना गया है। प्रत्येक रोमकूपमें दो-दो रोम होनेपर मनुष्य श्रोत्रिय या पण्डित होता है। तीन-तीन रोमोंसे व्याप्त रोमकूप दरिद्रोंके होते हैं।
मांसरहित, अत्यन्त कृश जानुयुगलवाला मनुष्य रोगी होता है। समान उदरभागसे सुशोभित मनुष्य अतिशय भोगसे समृद्ध और कुम्भके सदृश उन्नत या सर्पके समान उदरभागवाले लोग अत्यन्त दरिद्र होते हैं।
रेखाओंके द्वारा आयुका निर्णय किया जाता है। जिसके ललाटपर समान आकारवाली तीन रेखाएँ स्पष्ट दिखायी देती हैं, वह पुत्रादिसे सम्पन्न रहकर सुखपूर्वक साठ वर्षतक जीवित रहता है। मस्तकपर दो रेखाओंके दृष्टिगोचर होनेपर मनुष्यकी आयु चालीस वर्षकी होती है। एक रेखाके होनेपर उस मनुष्यका जीवन बीस वर्ष मानना चाहिये, किंतु कर्णपर्यन्त एक रेखाके होनेपर वह शतायु होता है।
ललाटपर कानतक विस्तृत दो रेखाओंके होनेसे मनुष्यकी आयु सत्तर वर्ष तथा वैसी ही तीन रेखाओंके रहनेपर उसकी आयु साठ वर्ष होती है। ललाटपर रेखाओंकी व्यक्त (प्रकट)-अव्यक्त (अप्रकट) स्थिति होनेपर मनुष्य बीस वर्षकी अल्पायुको ही प्राप्त करता है। रेखाविहीन ललाटके होनेपर मनुष्य चालीस वर्षतक जीवित रहता है। रेखाओंके छिन्न-भिन्न रहनेपर मनुष्यकी अकालमृत्यु होती है।
जिसके मस्तकपर त्रिशूल अथवा फरसेके समान चिह्न दिखायी देता है, वह धन-पुत्रादिसे परिपूर्ण होकर सौ वर्षतक जीवित रहता है।
हे रुद्र ! तर्जनी और मध्यमा अंगुलीके मध्यभागतक