भारतकोश
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished634 पृष्ठ

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११० संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-

साथ सहवास करता है। दीर्घ नासिकाके रहनेपर सौभाग्यवान् एवं आकुंचित अर्थात् टेढ़ी नासिका होनेसे व्यक्ति चौरकार्यमें प्रवृत्त होता है। नासिकाके चिपटी होनेपर मनुष्यकी अकालमृत्यु होती है। भाग्यवान्‌की नासिका छोटी होती है। चक्रवर्ती सम्राट्‌की नासिकामें छोटे-छोटे गोल और सीधे छिद्र होते हैं। दक्षिणभागकी ओर नासिकाके वक्र होनेपर मनुष्योंमें क्रूर-स्वभाव होता है।

वक्र उपान्तभागोंसे युक्त तथा पद्म-पत्रके समान सुन्दर नेत्र सुखी लोगोंके होते हैं। बिल्लीके सदृश नेत्रोंके होनेपर मनुष्य पापात्मा तथा मधु- पिंगलवर्णवाले नेत्रोंके होनेपर वह दुरात्मा होता है। केकड़ेके नेत्रोंकी भाँति नेत्र होनेसे व्यक्ति क्रूर और हरितवर्णके नेत्रवाले पापकर्ममें अनुरक्त होते हैं। वक्र नेत्र बलवान् पुरुषोंका लक्षण है। हाथीके समान नेत्रोंवाले मनुष्य सेनानी होते हैं। गम्भीर नेत्रोंवाला पुरुष राजा तथा स्थूल नेत्रोंवाला मन्त्री होता है। नीलकमलके सदृश नेत्रोंके होनेपर व्यक्ति विद्वान् तथा श्यामवर्णके नेत्रवाले सौभाग्यशाली होते हैं। कृष्णवर्णके तारक विन्दुओंसे युक्त नेत्रोंवाले पुरुषोंमें उत्पाटन-क्षमता होती है। मण्डलाकार नेत्रोंके होनेपर व्यक्ति पापी तथा दैन्यभावयुक्त नेत्रवाले मनुष्य दरिद्र होते हैं। सुन्दर एवं विशाल नेत्रोंवाले संसारमें विभिन्न प्रकारके सुखोंका उपभोग करते हैं। जिनके नेत्र अधिक उन्नत अर्थात् ऊपरकी ओर अधिक उठे होते हैं, वे अल्पायु होते हैं। विशाल और उन्नत नेत्रोंके होनेपर मनुष्य सुखी होते हैं।

विषम भौंहोंवाले दरिद्र होते हैं तथा दीर्घ, सघन, एक-दूसरेसे संयुक्त, बालचन्द्रके सदृश पतले, वक्र एवं उन्नत सुन्दर भौंहोंसे सुशोभित प्राणी धन-वैभवसे सम्पन्न होते हैं। मध्यभागमें कटी हुई भौंहोंके होनेपर मनुष्य निर्धन तथा झुकी हुई भौंहोंके होनेसे अगम्या स्त्रियोंमें रत रहनेवाले और पुत्रसे रहित होते हैं।

उन्नत, विशाल, शङ्खाकार एवं विषम मस्तक होनेपर पुरुषोंमें निर्धनता और अर्द्धचन्द्राकार ललाटके होनेपर वे धनसम्पन्नतासे परिपूर्ण रहते हैं। सीपके समान आभावाले तथा विशाल मस्तकवाले आचार्यके पदको सुशोभित करते हैं, जिनके मस्तकोंपर शिराएँ स्पष्ट प्रतीत होती रहती हैं, वे पापकर्ममें लगे रहते हैं। उन्नत शिराओंसे युक्त स्वस्तिकाकार, सुन्दर ललाटके होनेपर मनुष्य धनवान् तथा निम्न ललाटके होनेपर बन्दी बनाये जानेयोग्य होते हैं और क्रूर कर्मोंको करते हैं। गोल ललाटवाले कृपण और उन्नत भालवाले राजा होते हैं।

लोगोंका अश्रुरहित, दीनतारहित, स्निग्ध रुदन मङ्गलकारी होता है तथा अविरल अश्रुधारवाला, दैन्यभावको प्रकट करता हुआ रूखा रुदन सुखकारी होता है।

कम्पनरहित हँसी श्रेष्ठ होती है। आँख मूँदकर हँसनेवाला व्यक्ति पापी होता है। बार-बार हँसनेवाला दुष्ट होता है और उन्मत्तकी हँसी अनेक प्रकारकी होती है।

सौ वर्षतक जीवन प्राप्त करनेवाले लोगोंके मस्तकपर तीन रेखाएँ होती हैं। मस्तकपर चार रेखाओंके होनेपर मनुष्य राजा होता है और उसकी आयु पंचानबे वर्षतक होती है। रेखारहित ललाटवाला व्यक्ति नब्बे वर्ष जीवित रहता है। विच्छिन्न रेखाओंसे व्याप्त मस्तकवाले पुरुष लम्पट होते हैं। मस्तकपर केशपर्यन्त रेखाओंके होनेसे मनुष्यकी आयु अस्सी वर्षकी होती है। पाँच, छः अथवा सात रेखाओंके होनेसे प्राणीकी आयु पचास वर्ष तथा सातसे अधिक रेखाओंके होनेपर चालीस वर्षकी आयु माननी चाहिये। मस्तकपर रेखाओंकी वक्रता एवं भौंहपर्यन्त स्थिति होनेसे पुरुष तीस