गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३८ संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-
नेदिष्ठ नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। उससे अम्बरीष हुआ। अम्बरीषके विरूप, विरूपके पृषदश्व और उसके रथीनर हुआ, जो वासुदेवका भक्त था। मनुपुत्र इक्ष्वाकुके विकुक्षि, निमि और दण्डक तीन पुत्र हुए। विकुक्षि यज्ञीय शशक (खरगोश)- का भक्षण करनेके कारण शशाद नामसे विख्यात हुआ। शशादसे पुरञ्जय और ककुत्स्थ नामक दो पुत्र हुए। इसी ककुत्स्थसे अनेनस् (वेण) तथा अनेनस्से पृथु उत्पन्न हुआ। पृथुके विश्वरात नामक पुत्र हुआ। विश्वरातसे आर्द्रकी उत्पत्ति हुई। आर्द्रसे युवनाश्व, युवनाश्वके श्रीवत्स, श्रीवत्सके बृहदश्व, बृहदश्वके कुवलाश्व और कुवलाश्वके दृढाश्व हुआ, जिसकी प्रसिद्धि धुन्धुमारके नामसे हुई थी। दृढाश्वके चन्द्राश्व, कपिलाश्व और हर्यश्व नामक तीन पुत्र थे। हर्यश्वके निकुम्भ, निकुम्भके हिताश्व, हिताश्वके पूजाश्व और उसके युवनाश्व हुआ। युवनाश्वके मान्धाता हुए। मान्धाता एवं उनकी पत्नी बिन्दुमतीसे मुचुकुन्द, अम्बरीष तथा पुरुकुत्स नामक तीन पुत्रोंका जन्म हुआ। उनकी पचास कन्याएँ भी थीं। जिनका विवाह सौभरि मुनिके साथ हुआ था। अम्बरीषके युवनाश्व तथा युवनाश्वके हरित हुआ। पुरुकुत्सके नर्मदा नामक पत्नीसे त्रसदस्यु नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। उससे अनरण्य, अनरण्यसे हर्यश्व, हर्यश्वसे वसुमना हुआ। उसीका पुत्र त्रिधन्वा था। उसके त्रय्यारुण नामक पुत्र हुआ। त्रय्यारुणके सत्यरत हुआ, जो त्रिशंकु नामसे प्रसिद्ध है। हरिश्चन्द्र इसीसे उत्पन्न हुए थे। हरिश्चन्द्रके रोहिताश्व और रोहिताश्वके हारीत हुआ। हारीतके चंचु, चंचुके विजय, विजयके रुरुक, रुरुकके वृक, वृकके राजा बाहु और बाहुके पुत्र राजा सगर माने जाते हैं। हे शिव! सगरसे सुमति नामक पत्नीके साठ हजार पुत्र हुए। उनकी दूसरी पत्नी केशिनीसे असमंजस नामक एक पुत्र हुआ। उस असमंजससे अंशुमान् तथा अंशुमान्से दिलीप नामक एक विद्वान् पुत्रने जन्म लिया। दिलीपसे भगीरथ हुए, जिनके द्वारा पृथिवीपर गङ्गा लायी गयी हैं। भगीरथका पुत्र श्रुत था। श्रुतसे नाभाग हुआ। नाभागसे अम्बरीष, अम्बरीषसे सिन्धुद्वीप, सिन्धुद्वीपसे अयुतायु हुआ। अयुतायुका पुत्र ऋतुपर्ण था, ऋतुपर्णसे सर्वकाम और सर्वकामसे सुदास, सुदाससे सौदास हुआ। जिसका नाम मित्रसह भी माना जाता है। कल्माषपाद उसीका पुत्र है, जो दमयन्तीके गर्भसे उत्पन्न हुआ था। कल्माषपादके अश्मक, अश्मकके मूलक, मूलकके दशरथ हुआ। दशरथके ऐलविल, ऐलविलके विश्वसह, विश्वसहके खट्वाङ्ग, खट्वाङ्गके दीर्घबाहु, दीर्घबाहुके अज तथा अजके दशरथ हुए। इनके महापराक्रमी चार पुत्र हुए, जो राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न नामसे प्रसिद्ध हैं। रामसे कुश और लव, भरतसे तार्क्ष तथा पुष्कर, लक्ष्मणसे चित्राङ्गद एवं चन्द्रकेतु और शत्रुघ्नसे सुबाहु तथा शूरसेन नामक पुत्र हुए। कुशके अतिथि, अतिथिके निषध नामक पुत्र हुआ। निषधके नल तथा नलके नभस नामका पुत्र माना गया है। नभसके पुण्डरीक और पुण्डरीकसे क्षेमधन्वा नामक पुत्रने जन्म लिया। उसका पुत्र देवानीक था, उससे अहीनक, अहीनकसे रुरु तथा रुरुसे पारियात्र नामक पुत्रका जन्म हुआ। पारियात्रसे दलकी उत्पत्ति हुई और दलसे छल, छलसे उक्थ, उक्थसे वज्रनाभ और वज्रनाभसे गण, गणसे उषिताश्व, उषिताश्वसे विश्वसहकी उत्पत्ति हुई। हिरण्यनाभ उसीका पुत्र था। उसका पुत्र पुष्प्य माना गया है। पुष्प्यसे ध्रुवसन्धि, ध्रुवसन्धिसे सुदर्शन, सुदर्शनसे अग्निवर्ण, अग्निवर्णसे पद्मवर्ण हुआ। पद्मवर्णसे शीघ्र और शीघ्रसे मरु हुए। मरुसे सुश्रुत और