भारतकोश
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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काण्ड ]अच्युतस्तोत्र४२९

मार्कण्डेयमुनिके द्वारा की गयी स्तुतिको सुनकर विष्णु-दूतोंसे संत्रस्त मृत्यु भाग जाती है। इस स्तोत्रका पाठकर बुद्धिमान् श्रीमार्कण्डेयने मृत्युपर विजय प्राप्त कर ली। पुण्डरीकाक्ष श्रीनृसिंह महाविष्णुके प्रसन्न होनेपर कुछ भी दुर्लभ नहीं है।

यह मृत्वष्टकस्तोत्र महापुण्यशाली है, मृत्युका विनाश करनेवाला और मङ्गलदायक है। मार्कण्डेयमुनिका कल्याण करनेके लिये भगवान् विष्णुने स्वयं इस स्तोत्रको कहा था। जो मनुष्य नित्य तीनों कालोंमें पवित्रतासे भक्तिपूर्वक इस स्तुतिका नियमपूर्वक पाठ करता है, वह विष्णुभक्त अकालमृत्युसे ग्रस्त नहीं होता। जो योगी अपने हृदयकमलमें पुराणपुरुष, सनातन, अप्रमेय तथा सूर्यसे भी अत्यधिक तेजस्वी नारायणका ध्यान करता है, वह मृत्युपर विजय प्राप्त कर लेता है।

(अध्याय २३३)


अच्युतस्तोत्र

सूतजीने कहा—हे शौनक! अब मैं अच्युतस्तोत्रका वर्णन करूँगा जो प्राणियोंको सब कुछ प्रदान करनेवाला है। देवर्षि नारदके पूछनेपर ब्रह्माजीने उस सर्वश्रेष्ठ स्तोत्रका जैसा वर्णन किया था, वैसा ही आप मुझसे सुनें।

नारदजीने पूछा—हे ब्रह्मन्! प्रतिदिन पूजाके समय जिस प्रकार अक्षय, अव्यय, वर प्रदान करनेवाले भगवान् विष्णुकी स्तुति मुझे करनी चाहिये, वह बतानेकी कृपा करें। वे सभी प्राणी धन्य हैं, उन सबका जन्म लेना सफल है, वे ही सब प्रकारका सुख प्राप्त करनेवाले हैं, उन्हीं सज्जनोंका जीवन सार्थक है, जो भगवान् अच्युत विष्णुकी सदैव स्तुति करते हैं।

ब्रह्माजीने कहा—हे मुने! मैं भगवान् वासुदेवका वह स्तोत्र जो प्राणियोंको मोक्ष देनेवाला है और जिस स्तोत्रके द्वारा पूजाकालमें सम्यक् स्तुति किये जानेपर भगवान् नारायण प्रसन्न होते हैं, उसे आपको सुनाता हूँ, सुनें। वह स्तोत्र इस प्रकार है—

ॐ नमो [ भगवते ] वासुदेवाय नमः सर्वाघहारिणे।
नमो विशुद्धदेहाय नमो ज्ञानस्वरूपिणे॥
नमः सर्वसुरेशाय नमः श्रीवत्सधारिणे।
नमश्चर्मासिहस्ताय नमः पङ्कजमालिने॥
नमो विश्वप्रतिष्ठाय नमः पीताम्बराय च।
नमो नृसिंहरूपाय वैकुण्ठाय नमो नमः॥
नमः पङ्कजनाभाय नमः क्षीरोदशायिने।
नमः सहस्रशीर्षाय नमो नागाङ्गशायिने॥
नमः परशुहस्ताय नमः क्षत्रान्तकारिणे।
नमः सत्यप्रतिज्ञाय ह्यजिताय नमो नमः॥
नमस्त्रैलोक्यनाथाय नमश्चक्रधराय च।
नमः शिवाय सूक्ष्माय पुराणाय नमो नमः॥
नमो वामनरूपाय बलिराज्यापहारिणे।
नमो यज्ञवराहाय गोविन्दाय नमो नमः॥
नमस्ते परमानन्द नमस्ते परमाक्षर।
नमस्ते ज्ञानसद्भाव नमस्ते ज्ञानदायक॥
नमस्ते परमाद्वैत नमस्ते पुरुषोत्तम।
नमस्ते विश्वकृद्देव नमस्ते विश्वभावन॥
नमस्ते स्ताद् विश्वनाथ नमस्ते विश्वकारण।
नमस्ते मधुदैत्यघ्न नमस्ते रावणान्तक॥
नमस्ते कंसकेशिघ्न नमस्ते कैटभार्दन।
नमस्ते शतपत्राक्ष नमस्ते गरुडध्वज॥
नमस्ते कालनेमिघ्न नमस्ते गरुडासन।
नमस्ते देवकीपुत्र नमस्ते वृष्णिनन्दन॥
नमस्ते रुक्मिणीकान्त नमस्तेऽदितिनन्दन।
नमस्ते गोकुलावास नमस्ते गोकुलप्रिय॥
जय गोपवपुः कृष्ण जय गोपीजनप्रिय।
जय गोवर्धनाधार जय गोकुलवर्धन॥
जय रावणवीरघ्न जय चाणूरनाशन।
जय वृष्णिकुलोद्योत जय कालीयमर्दन॥