भारतकोश
गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

गौतम धर्मसूत्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Gautama Dharmasutra Hindi

महर्षि गौतम द्वारा

स्रोत: Gautama Dharmasutram with Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished360 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 360 में से

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पृष्ठ 6

दो शब्द

भारतीय साहित्य से परिचित सुधी पाठकों को 'गौतम-धर्म-सूत्र' का परिचय देने की आवश्यकता नहीं। धर्मग्रन्थों में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है। आज के युग में भारतीय धर्म के शाश्वत मूल्यों की स्थापना के बिना समाज को सही दिशा कठिनाई से मिल सकती है। आवश्यकता है अपने अतीत की सभी अच्छाइयों को ग्रहण कर वर्तमान जीवन में पिरोने की, और इसके लिए हमें उस अतीत को सही रूप में पहचानना होगा।

'गौतम-धर्म-सूत्र' का यह संस्करण उस अमूल्य निधि के एक अंश को आधुनिक पाठक के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास है। केवल सूत्रों में ही हिन्दी व्याख्या दी गयी है और इस बात का प्रयत्न किया गया है कि सूत्र का पूरा अर्थ सरलता से, स्पष्ट हो जाय। भूमिका में सूत्र साहित्य, भारतीय धर्म और इस ग्रन्थ की विषयवस्तु के कुछ पक्षों पर आलोचनात्मक दृष्टि से विचार किया गया है।

मैं इस बात का दावा नहीं करता कि मेरा योगदान बहुत महत्त्वपूर्ण है। बहुधा लेखक कतिपय सीमाओं में बद्ध होता है। इस ग्रन्थ को वर्तमान कलेवर प्रदान करने का श्रेय चौखम्बा संस्कृत सीरीज़ आफिस के सुयोग्य प्रबन्धकों को है, जो संस्कृत एवं संस्कृति की सेवा और प्रतिष्ठापना में चिरकाल से अहर्निश संलग्न हैं। मैंने उन्हीं की प्रेरणा से इस पुस्तक के वर्तमान संस्करण द्वारा भारतीय वाङ्मय की जो तुच्छ सेवा की है उससे मुझे संकोच है, किन्तु सन्तोष भी है।

अपनी ओर से दो शब्द कहते हुए मैं अपने कतिपय प्रियजनों का, जो मेरे जीवन के मधुर प्रेरणा-स्रोत हैं, प्रेम और कृतज्ञता से स्मरण करता हूँ। मेरा श्रम निष्फल नहीं होगा, यही मेरी आशा है।

'विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव।
यद् भद्रं तन्न आ सुव॥'

विनीत-
उमेशचन्द्र पाण्डेय


२ गौ० भू०

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