भारतकोश
गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary

महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 261

: there is a 'ज', is there a dot? No dot. It's printed as "अनुषजनार्थश्चकारः" or "अनुषञ्जनार्थश्चकारः").

Let's check line 16: "मङ्गल्ये दक्षिणाभिमुखेन क्रियापत्तेरिति भाष्यकृतः । अवस्था य । ऊर्ध्वःस्थित्वा ।" Wait, "क्रियापत्तेरिति" or "क्रियाप्रवृत्तेरिति"? Look at L16: "मङ्गल्ये दक्षिणाभिमुखेन क्रियापत्तेरिति" -> क्री (kri) या (yā) प (pa) त्ते (tte) रि (ri) ति (ti) Yes, "क्रियापत्तेरिति" (kriyā-āpatteḥ iti = because the action would fall/occur facing south, which is inauspicious). "मङ्गल्ये दक्षिणाभिमुखेन क्रियापत्तेरिति भाष्यकृतः" - brilliant Sanskrit logic! Facing south in an auspicious rite would be an āpatti (undesirable occurrence).

Line 16-17: "अवस्था य । ऊर्ध्वःस्थित्वा । मन्त्रवान्-अध्ययनयुक्तः ।" Wait, "ऊर्ध्वःस्थित्वा" or "ऊर्ध्वं स्थित्वा"? Look at L16: "ऊर्ध्वःस्थित्वा" -> "ऊ र्ध्वः स्थि त्वा" (there