भारतकोश
गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary

महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 332 में से

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आकार stroke, making 'तो'! So it is "पद्धतिकृतो वीरेश्वरादयः". Wait, what about the word before: "तात्प-" Then next line: "र्यगत्या" So "तात्पर्यगत्या"! And before "तात्पर्यगत्या": "...सकृदेवेतितात्प-" Wait, is it "सकृदेवेति तात्पर्यगत्या" or "सकृदेवेतितात्पर्यगत्या"? There is no space before तात्प-, but at the line break. Now look at the word before "सकृदेवेति": Is it "मन्यस्य" or "मन्यश्च"? Wait, let's re-read: "नियतकर्तृत्वन्दर्शितम् । इति । एवञ्च विष्टरादिनिवेदनमन्यस्य सकृदेवेतितात्प-" Wait, look at the letters: म - न्य - ? Wait, is it "मन्यस्य"? Let's compare the 'स्य' with 'स्य' in 'पारस्करगृह्यमेव' (line 26, ह्य), 'दर्शितम्' (line 28), 'अस्य' etc. Wait, look at the word: "विष्टरादिनिवेदनम्" -> ending in 'म्'. Then "अन्यस्य" -> 'अ' is fused with 'म्' into 'म'! So "विष्टरादिनिवेदनम् + अन्यस्य = विष्टरादिनिवेदनमन

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