गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 35, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ें( २१ ) कण्डिका विषय पृष्ठ प्रपाठक २ ॥ १--इन्द्र-अग्नि अर्थात् प्राण और अपान के लिये यज्ञ के लाभ ... ३०५ २--देवताओं ने पाँच प्रकार से चढ़ाई करके असुरों को जीता ... ३०७ ३--यजुर्वेद के मन्त्र के आश्रय से यज्ञ कर्म ... ३०६ ४--सोम यज्ञ में त्रुटि की यजुर्वेद मन्त्र से पूर्ति ... ३११ ५--यज्ञ में दोषों को ब्रह्मा ठीक कर सकता है ... ३१४ ६--यज्ञ, धर्म और प्रवर्ग्य का वर्णन ... ... ३१७ ७--देवासुर सङ्ग्राम में उपसद् यज्ञ द्वारा देवताओं का विजय - ३२१ ८--उपसद् यज्ञों का अधिक वर्णन ... ... ३२४ ९--आग्नीध्र द्वारा देवपत्नियों का वर्णन .. ... ३२५ १०--यज्ञ में सोमपान की महिमा ... ... ३२८ ११--देवताओं ने यज्ञ द्वारा असुरों पर विजय पाया ... ... ३३० १२ सोम यज्ञ का वर्णन .. ... ... ३३२ १३--आख्यायिका-वसिष्ठ ने इन्द्र को देखा और इन्द्र ने उसे स्तोम- भागों द्वारा ब्रह्मज्ञान बताया ... ... ... ३३६ १४--आगे और स्तोमभागों और व्याहृतियों का वर्णन ... - ३३६ १५ स्तोमभागों से शत्रुओं का नाश ... ... ३४२ १६--आग्नीध्र द्वारा यज्ञ की सिद्धि ... ... ३४३ १७--प्रवृत्त आहुतियों का वर्णन ... ... ३४५ १८ प्रजापति को नमस्कार ... - ३४६ १६--सदस्य गन्धर्वों को नमस्कार ... ... ३४७ २०--प्रातःसवन में इन्द्र आदि के लिये हवि का निर्णय ... ... ३४६ २१ माध्यन्दिन सवन में इन्द्र को हवि ... ... ३५२ २२--तृतीय सवन में इन्द्र और ऋभुओं को हवि ... ... ३५५ २३--सत्य ही बोलना चाहिये ... ... ... ३५६ २४- दर्शपूर्णमास यज्ञ में देवताओं को एक दिन पहिले निमन्त्रण करे ... ३६० प्रपाठक ३ ॥ १-वषट्कार और अनुवषट्कार का वर्णन ... ... ३६१ २-वषट्कार वज्र, छह ऋतु और छह आकाश आदि हैं ... ३६३ ३-तीन वषट्कार वज्र, धामच्छत् और रिक्त का वर्णन ... ३६५ ४-वषट्कार के साथ हवि के लिये देवता का निर्णय ... ३६७ ५-वषट्कार को उपयोगी बनाने का उपाय ... ३६७ ६-वाक् और प्राण और अपान ही वषट्कार हैं ... ३६६ ७-प्राण ही ऋतुयाज हैं, ऋतुयाजों में अनुवषट् न करे ... ३७१