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गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

हम जो इंजीनियरिंग करते हैं, ये अंग्रेजों का बनाया पाठ्यक्रम है, ताकि अंग्रेज अपने लिए इंजीनियर तैयार कर सके, और हम भी उनके के लिए काम करते हैं, ज्यादातर इंजीनियर या तो देश के बाहर काम करता है, या फिर देश के अन्दर विदेशी कम्पनी में जिसे हम मल्टीनेशनल कम्पनी कहते हैं, हमारे देश में सन् 1200 से इंजीनियरिंग चली आ रही है, जब 18 विषय होते थे, ये बात कोई नहीं जानता क्योंकि अंग्रेजों ने हमारे सारे दास्तावेज जला दिये थे। हमारे भारत में सबसे कम खर्चे पर इंजीनियर तैयार हो जाते हैं, इसलिए अमेरिका और यूरोप वाले भारत में अपने लिए इंजीनियर तैयार करते हैं, और उनका ऐसा ही पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं जो उनके देश के काम आ सके, यह पाठ्यक्रम कभी भी भारत के लिए काम नहीं आ सकता। इसलिए हमारी मानसिकता ऐसी बन जाती है कि हम या तो विदेश में जाकर काम करते हैं या फिर अपने देश में बहुराष्ट्रीय कम्पनी में। अमेरिका और यूरोप वालों का कहना है की भारतीयों को सबसे कम आय पर सबसे अच्छी सर्विस देते हैं, वे तो बस डॉलर में सैलरी सुनते हैं खुश हो जाते हैं।

A black and white line drawing. On the left, a man in a suit and tie stands with his right hand pointing towards a person on the ground. The person on the ground is in a crawling or kneeling position. To the right, another man in a suit stands with his hands on his hips, looking towards the person on the ground. A small ball is on the ground between them, with a dotted line extending from it towards the man on the right.

अब जागो और अपने देश के लिए काम करो।

जापान का इंजीनियर जापान के लिए काम करता है.

चीन का इंजीनियर चीन के लिए काम करता है.

जर्मनी का इंजीनियर जर्मनी के लिए काम करता है.

इसी तरह लगभग सारे देश अपने देश के लिए काम करते हैं.

लेकिन हमारे देश के लोगों को गुलाम बनने की आदत हो गयी है।

अब जागो और स्वदेश अपनाओं, गुरुकुल में ही शिक्षा दें।।

-रोबिन सिराना

दोस्तो आप वेस्टर्न कल्चर अपना रहे है तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन यह जरूर याद रखें – सूरज जब भी वेस्ट(पश्चिम) में गया है, तब हमेशा डूबा ही हैं।

सौजन्य से हेमचन्द्राचार्य गुरुकुलम्

हीरा जैन सोसायटी के निकट, रामनगर, साबरमती, अहमदाबाद, गुजरात दूरभाष – 9033543543

संग्रहकर्ता रोबिन सिराना

स्वदेशी अपनाओं, देश बचाओ

स्वदेशी अपनाओं, देश बचाओ

अमर शहीद राजीव दीक्षित जी

आज भी गुलाम

भाषा - अंग्रेजी भूषा - अंग्रेजी स्वनापीना - अंग्रेजी चिकित्सा - अंग्रेजी जरूरतें - अंग्रेजी

दिमाग में सोच भी अंग्रेजी, किस मुहँ से कहते हो हम आजाद हैं। अधिकांश भारतीय वो मानसिक गुलाम है जिसका आज तक इलाज नहीं हुआ