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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 148

६२ हम्मीररासो रतनेस नाँम जम है बिख्यात । चित्तोड़ दुग्ग पालै सु तात ॥३५२॥ सँग रहै सुभट थट विक्ट संग¹ । को करै तिनहिं तैं रणहिं रंग ॥ तप तेज राव बृषभाँन जेम । पर दुख कट्टन बिक्रम सु तेम ॥३५३॥ देखंत² रूप मनु काँमदेव । सुइ काछ बाछ निकलंक भेव ॥ अरु खेत जुरे नहिं देत पिट्ठि । अरि लखत देखि नहिं परत³ दिट्ठि ॥३५४॥ बहु बाग चहूँ दिसि सघन हेरि । गंभीर गहर उपषन सु भेरि ॥ बहु अंब⁴ बृक्ष फल झुकत भार । दाड़िम समूह निंबू अपार ॥३५५॥ वहु सेवराज जामुन समूह । नारंग रंग महुवा समूह ॥ खिरनी सकेलि नारेल⁵ बृंद । खीरा कि चिरुँजी मधुर कंद⁶ ॥३५६॥ कटहल कदंब बड़हल अनेक । महुवा अनंत कद्दलि बिसेक(ष)⁷ ॥ तहँ मोलसिरी सोहैं गंभीर । माघी सकेत सोहंत धीर⁸ ॥३५७॥ फुलवारि गुंज अति अमर होत⁹ ।


१ बिकट थट्ट रह सुभट संग । २ पिक्खंत । ३ परम । ४ आम्र । ५ नरियल । ६ कंज । ७ ऊभरि अनंत घोटा सु एक । ८ मधि किते सरणँ (सहं) सोहंत कीर । ६ फुलवारि भौर गुंजार होत । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri