हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
पृष्ठ 10, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 10
( २ ) हारीतसंहिता-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| हेमन्तवर्णन .... | २४ | वायुका कोप .... .... | ३५ |
| शिशिरवर्णन .... | २५ | पित्तप्रकोपानदान.... .... | ३६ |
| वसंतऋतुका वर्णन .... | " | कफप्रकोपानदान.... .... | ३७ |
| ग्रीष्मवर्णन .... | २६ | द्वौ दोषोंके कोपकी उत्पत्ति .... | " |
| इसके वाद वयोज्ञानका कथन .... | २७ | सन्निपातकी उत्पत्ति .... | ३८ |
| मध्यमवयोर्लक्षण .... | " | रसोंके गुणदोषका वर्णन .... | " |
| प्रकृतिका ज्ञान .... | २९ | षड्रसके गुणदोषवर्णन .... | ३९ |
| वातादिप्रकृतिका ज्ञान .... | " | रसगुणोंके गुणकर.... .... | " |
| वातप्रकृतिका लक्षण .... | " | वातादिविरुद्धरस .... .... | " |
| पित्तप्रकृतिका लक्षण .... | " | दोषोंके विरोधीरसोंका वर्णन .... | " |
| कफप्रकृतिका लक्षण .... | ३० | वातादिकोंमें रसयोजना .... | ४० |
| समप्रकृतिका लक्षण .... | " | मधुररसका वर्णन .... .... | " |
| पूर्वदिशाका वायु .... | " | कडुए रसका वर्णन .... | " |
| आग्नेयदिशाका वायु .... | ३१ | चरपरे रसका वर्णन .... | " |
| दक्षिणदिशाका वायु .... | " | खट्टे रसका वर्णन.... .... | ४१ |
| नैर्ऋत्यदिशाका वायु .... | " | कसैले रसका वर्णन .... | " |
| पश्चिमदिशाका वायु .... | ३२ | खारे रसके वीर्य्यका वर्णन .... | " |
| वायव्यदिशाका वायु .... | " | पानीका वर्ण .... .... | ४२ |
| उत्तरदिशाका वायु .... | " | जलके भेद .... .... | " |
| ऐशानदिशाका वायु .... | " | गंगापानीकी परीक्षा .... | " |
| अन्य पंचविध वायुके गुण .... | " | गंगाजलके गुण .... .... | ४३ |
| वस्त्रवायुके गुण .... | " | सामुद्र पानीका लक्षण और गुण.... | " |
| वेणुवायुगुण .... | ३३ | चारप्रकारकी वृष्टि.... .... | " |
| कांस्यपात्रवायुके गुण .... | " | रात्रिको वर्षे हुए पानीके गुण-दोष वर्णन .... .... | " |
| रंभातालपत्रवायुके गुण .... | " | " | " |
| खसशिखिपूच्छव्यजनवायुके गुण.... | " | दुर्दिनमें वर्षेहुए पानीके गुण-दोषवर्णन .... .... | " |
| षड़तुओमें उत्तमदिक् वायु .... | ३४ | " | " |
| प्रतिदिन षड्ऋतु .... | " | दुर्दिनमें वर्षे हुए पानीके गुणदोष वर्णन .... .... | ४४ |
| सचिववायु .... | " | " | " |
| ऋतुभेदसेवातादिकोंका संचय, कोप, उपराम | ३५ | क्षणवृष्टिके गुण .... .... | " |