हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 317, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ०[१०] भाषाटीकासमेता । ( २८५ ) असाध्य जानना अथवा कष्टसे सिद्ध होता है ॥ १२ ॥ एक मार्गसे उठा हुआ अथवा नाभिके देशसे उठा हुआ रक्तपित्त साध्य है और उपद्रवोंसे रहित है ॥ १३ ॥ एकदोषसे उत्पन्नहुआ साध्य होता है, दो दोषोंसे उत्पन्न हुआ याप्यरोग होता है और तीन दोषोंसे उत्पन्न हुआ रक्तपित्त असाध्य कहाता है ॥ १४ ॥ और जब रक्तपित्त ऊर्ध्व भागमें प्राप्त होवे तब जुलाब दिवावे और जब रक्त अधोभागमें स्थित हो तब वमन कराना चाहिये ॥ १५ ॥ अथ रक्तपित्तके उपद्रव । रोगक्षीणे छविविकले हीनदौर्बल्यकाये मन्दाग्निर्वा क्षवथुरथवा पाण्डुता दाहशोषः॥तृष्णा छर्दिः श्वसनमधृतिर्भक्तविद्वेषमोहो हृत्पीडा स्याद्ग्रममथ भवेद्रक्तपित्तोपसर्गात् ॥१६॥ अष्टादश इमे प्रोक्ता रक्तपित्तउपद्रवाः ॥ उपद्रवैर्विना साध्योऽसाध्यः सोपद्रवस्तथा ॥१७॥ रक्तनिष्ठीवनोपेतो रक्तनेत्रो भ्रमातुरः ॥ रक्तमूत्रश्च वमते रक्तमूत्री न जीवति ॥ १८ ॥ रोगसे क्षीण होजावे और कांतिसे रहित होजावे, शरीर हीन होजावे और दुर्बल होजावे,मन्द अग्नि होजावे, छींकहो, पांडरोगहो, दाहहो, शोषहो, तृषाहो, छर्दिहो, श्वासहो, धीरज नहीं रहे, भोजनसे बैर रहे, मोह रहे, हृदयमें पीडा रहे, रक्त और पित्तके उपसर्गसे भ्रमहो, ऐसे ये ॥ १६ ॥ अठारह रक्तपित्तके उपद्रव कहे हैं । उपद्रवोंसे रहित रक्तपित्त रोग साध्य कहा है और उपद्रवोंसे संयुक्त रक्तपित्त असाध्य कहा है ॥ १७ ॥ रक्तके थूकनेसे युक्त हो, रक्तनेत्र हो, भ्रमसे आतुर हो और रक्तमूत्रवाला पुरुष वमन करता है, वह जीता नहीं है ॥ १८ ॥ अथ रक्तपित्तका लक्षण । एवं प्रोक्तो निदानार्थस्ततो वक्ष्यामि भेषजम्॥सुलक्षणसमायुक्तं रक्तपित्तं सुखावहम् ॥१९॥ यस्यारुणं पवनफेनयुतं च तावत्पि- त्तात्तिकृष्णमथ पीतकुसुम्भकाभम् ॥ पित्तेन पित्तमिति तं प्रव- दन्ति धीराः सान्द्रं सपाण्डुरतिजं सघनं कफेन ॥२०॥ इस प्रकार निदान तो कहदिया है अब औषध कहेंगे । सुंदरलक्षणोंसे युक्त रक्तपित्त सुख- साध्य कहा है॥१९॥जो झागों सहित और लाल थूके वह वातसे उपजा रक्तपित्त जानना और पित्त अधिक हो तो काला और कसुंभाके डहलके समान थूके उसको पित्तसे उपजा रक्तपित्त कहते हैं और कफसे होवे तो कडा और पीला सफेद चिकना ऐसा थूके ॥ २० ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu