हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअ० २८ ] भाषाटीकासमेता । ( ३८७ ) ॥ १४॥ मुस्ता फलत्रिकनिशा सुरदारु मूर्वा इन्द्रा च रोध्रस- लिलेन कृतः कषायः॥ पाने हितः सकलमेहभवे गदे च मूत्र- ग्रहेषु सकलेषु नियोजनीयः ॥१५॥ यच्चाभयालोहरजो निकु- म्भचूर्णं हितं शर्करया समेतम् ॥ फलत्रिकाया मधुना च लेहं सर्वप्रमेहेषु हितं वदन्ति ॥ १६ ॥ मधुमेहे प्रयोक्तव्यं घृतपानं सुधीमता ॥ क्षीरं वा शर्करायुक्तं क्वाथो वा गुटिकानि च ॥१७॥ न्यग्रोधोदुम्बराश्वत्थप्लक्षारग्वधटुण्डकम् ॥ पियालं कुकुभं जम्बूंकपित्थाम्रातकानि च ॥१८॥ मधुकं यष्टिमधुकं रोध्रं वै पारिभद्रकम् ॥ पटोलं चारिणी चैव दन्ती मेषविषाणिका १९ चित्रकं च करञ्जञ्च शक्राङ्गं त्रिफलायुतम्॥ भल्लातकानाञ्च समं त्रिगन्धं कटुकत्रयम् ॥२०॥ सूक्ष्मचूर्णं प्रदातव्यं न्यग्रोधाद्यं गुणाधिकम् ॥ मधुना संयुतं लेहो हन्याच्च मधुमेहकम्॥२१॥ क्वाथो वा तैलपाको वा घृतपाकोऽथवापि च ॥ पानाभ्यङ्गे प्रशस्तः स्याद्धन्ति वै मूत्रजं गदम् ॥ २२ ॥ न्यग्रोधाद्यमिदं चूर्णं पेयं वा क्षीरसंयुतम्॥ मधुमेहे तु नान्योऽस्ति यथालाभेन योजितः ॥२३॥ माक्षीकं धातुमाक्षीकं शिलोद्भेदं शिलाजतु॥ चन्दनं रक्तधातुश्च तथा कर्पूरकं कणाः ॥२४॥ वंशरोचनकं चैव क्षीरेण सहितं पिबेत् ॥ मधुमेहं हरति मूत्ररोगाद्वि- मुच्यते ॥ २५ ॥ धव, अर्जुन वृक्ष, चन्दन, शालवृक्ष इनकी छालका क्वाथ बना पीना जलप्रमेहमें हित है और रक्तप्रमेहमें दाख, मुलहटी, चन्दन इनसे युक्त ठंडा दूध पीना हित है ॥ ६ ॥ मैथुन स्वल्प करना, धव, अर्जुनवृक्ष इसका क्वाथ पीना पूयप्रमेहमें हित है और दूध, कसेरु, केला, कमलिनी इनका क्वाथ लवणप्रमेहमें हित है ॥ ७ ॥ कदंब, अर्जुनवृक्ष, शाल, अजमोद, बायविडंग, दारुहलदी, धव, शल्लकीवृक्ष, इनकी क्वाथ शहदके संग पीना कफप्रमेहमें हित है ॥ ८ ॥ लोध्र, अर्जुनवृक्ष, दूध, नींवके पत्ते, आंवला, चन्दन, इनका क्वाथ अथवा गुड़में मिलाके गोली देना तक्रप्रमेह, खटिकाप्रमेह इनमें हित है ॥ ९ ॥ और दूब, मूर्वा, कुशा, कांस इनकी जड़, जमालघोटाकी जड़, मँजीठ, शालबन इनका Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus Kathmandu