हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(४००) हारीतसंहिता । [तृतीयस्थाने- वाथ धवार्जुनकदम्बकम् ॥ धावनं सर्पिणे शस्तं सुरासौवीर- केण वा ॥ ८ ॥ धावनञ्च हितं तस्य सन्निपाते विसर्पिणे ॥ यवाग्निमन्थैश्च शटीन्यग्रोधैश्च ससर्षपैः ॥९॥ क्वाथः स्यात्स- न्निपातोत्थविसर्पधावने हितः॥पञ्चजीरकपवित्थांश्च काञ्जिकेन तु पेषयेत्॥ मातुलुङ्गरसेनापि लेपनं वातसर्पिणे ॥१०॥ धवा- रोध्रतिलाश्रैलविदारीकण्टकं तथा ॥ लेपः पित्तविसर्पे वा गुआपत्रैस्तु लेपनम् ॥११॥ सैन्धवारिष्टतुम्बीकापटोलपत्रकै- घृतम्॥पाचितं लेपने शस्तं विसर्पाणां निवारणम् ॥ १२ ॥ रक्तजेषु विसर्पेषु कुर्य्याद्रक्तावसेचनम् ॥ पश्चाद्धवकदम्बानां सर्वदा गृहधूमकम् ॥१३॥ लेपने हितकृत्प्रोक्तं धावनं काञ्जि- केन तु ॥ कुठेरकाश्च सुरसा चक्रमर्दो निशायुगम् ॥ १४ ॥ सर्षपाः काञ्जिकेनापि पिष्ट्वा च लेपनं हितम् ॥१५॥ इत्या- त्रेयभाषिते हारीतोत्तरे तृतीयस्थाने विसर्पचिकित्सा नाम त्रयास्त्रिंशोऽध्यायः ॥ ३३ ॥ आत्रेयजी कहते हैं-नमक, खट्टा, खारा, चर्चरा, गरम, ऐसा पदार्थ सेवनेसे और पसीनेके दोषसे रक्तपित्त कुपित हो जाता है वह विसर्परोग कहाता है ॥ १ ॥ वह जुदे जुदे दोषों करके और द्वंदज दोषों करके सात प्रकारका होता है और केवल रक्तसे उपजा हुआ सन्निपातसे युक्त सातवां होता है ॥ २ ॥ अन्य कईक जन जुदे २ नामोंवाले इन रोगोंको कहते हैं । आक्षेपनामवाला, ग्रंथिकनामवाला, घोरनामवाला और कर्दमनामवाला ऐसे तीन प्रकारसे होता है ॥३॥ आक्षेप विसर्परोग वातपित्तसे होता है और ग्रंथिक पित्तकफसे होता है, कर्दमनामवाला पिसर्प वातकफसे होता है और घोरनामक सन्निपातसे होता है ॥४॥ रक्तक्रांति, त्वचा, मांस इनसे दूषित हुए तीनों दोष और सात धातु ये विसर्प रोगोंकी उत्पत्तिमें हेतु कहे हैं ॥ ५ ॥ और बड़,बेलगिरी, खैर इनके काथसे शरीरका धोवना हित है और कांजीका खटाई- के झागोंसे अथवा सौवीर संज्ञक कांजीके रससे ॥ ६ ॥ अथवा बिजौराके रससे धोवना वातसे उपजे विसर्परोगमें हित है और पित्तके विसर्पमें दूध और शीतल जलकरके धोवना हित हैं ॥७॥कफके विसर्परोगमें धव, अर्जुनवृक्ष,इनके काथसे अथवा मदिरा सौवीर संज्ञक कांजी इनसे धोवना हित है ॥ ८ ॥ सन्निपातके विसर्पमें भी मदिरा, सौवीर संज्ञक कांजी इनसे धोवना हित है और अजवायन,अरणी,कचूर,बड़,सरसों॥९॥इनके क्वाथसे सन्निपातसे उपजे विसर्पको