भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 435, कुल 548 में से

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पृष्ठ 435

अ० ३४] भाषाटीकासमेता । (४०३) चन्दनं मधुकं रोध्रं न्यग्रोधोत्पलसारिवा ॥ मधुना संयुक्तः कल्कः पानेन चोपसर्गहृत् ॥१७॥ उपसर्गे ज्वरस्तीव्रो रक्तमूत्रं प्रजा- यते ॥ तस्य वक्ष्याम्युपचारं येन संपद्यते सुखम् ॥ १८ ॥ पटोलं पर्पटं शुण्ठी मुस्ता च खदिरं समम् ॥ कल्को मधुयुतः पाने हितः स्याज्ज्वरनाशनः ॥१९॥ चन्दनोशीरमञ्जिष्ठा पु- ष्करं दन्तधावनम् ॥ क्वाथपानं मधुयुतमुपसर्गज्वरापहम् २०॥ वमने चातिसारे च दाडिमं कुटजस्तथा॥ मधुदधान्वितं पान- मतिसारनिवारणम् ॥ २१ ॥ शेषाश्च क्षुद्रिकाः प्रोक्ताः क्रिया चात्र विधेयका ॥ एका क्रिया मसूरिके कर्त्तव्या सुविधानतः ॥ २२ ॥ वातलानि च सर्वाणि तथा रूक्षाणि कोविदः ॥ स्त्री- सङ्गं रूक्षशोकञ्च दूरतः परिवर्जयेत् ॥ २३ ॥ ज्वरे प्रोक्तानि पथ्यानि तानि चात्र प्रदापयेत्॥एवं त्रिसप्तरात्रेण सुखं सम्प- द्यते नरः ॥ २४ ॥ ततोऽभिषेकः कर्त्तव्यः कृत्वा मङ्गलवाच- नम् ॥ नूतनानि च सूक्ष्माणि वस्त्राणि च सितानि च ॥२५॥ परिधाप्य होमकार्य्यमिष्टभोज्यं विधेयकम् ॥२६॥ इत्यात्रेय- भाषिते हारीतोत्तरे तृतीयस्थाने उपसर्गचिकित्सानाम चतु- स्त्रिशोऽध्यायः ॥ ३४ ॥ उपसर्गरोगमें घोर उपद्रवको देखिके पसीना नहीं दे, मर्दन नहीं करे और लेप भी नहीं करे पंडित जनोंने ऐसे जानना ॥ १५ ॥ वनके आरनोंकी राख और तेल करके चालन कर्म करना हित है, तेलसेभी मालिस और लेप नहीं करवावे ॥ १६ ॥ चंदन, महुआ, लोध, बड़, कमल, अनंतमूल, इनका कल्क बना शहदके संग पीनेसे उपसर्गरोगका नाश होता है ॥ १७॥ उपस- र्गरोगमें तीव्रज्वरहो लालमूत्र उतरै उसकी चिकित्सा कहते हैं जिससे सुख उत्पन्न होवे ॥१८॥ परवल, पित्तपापड़ा, सोंठ, नागरमोथा, खैर इनको समान भाग ले कल्क बना शहद मिला पीनेसे ज्वरका नाश होता है और यह हित है ॥ १९ ॥ चंदन, खश, मँजीठ, पोहकरमूल इनके क्वाथसे दांतोंका धोवना और इसमें शहद मिला पीनेसे उपसर्गरोगमें उपजे ज्वरका नाश होता है ॥ २० ॥ वमन, अतीसार इनमें अनारदाना इंद्रजौ इनका क्वाथ और शहद,दही इनके पीनेसे अतीसारका नाश होता है॥ २१॥ और बाकीके रहे सब क्षुद्ररोगमें यही क्रिया करनी। यह क्रिया

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