हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 475, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० ४७] भाषाटीकासमेता । (४४३) विदारीकंद, गोखरू, मूघापर्णी, आंवला, सेंधानमक, पीपली इनको समान भाग ले मिश्री मिला गौके दूधके संग पीवे ॥ ८ ॥ अतीश, दोनों कटेहली, पीपली, गोखरू, और कौंचके बीज, शतावरी, इनका चूर्ण बना खांड मिला पीछे गौके दूध घृतके संग पीनेसे मनुष्योंके वीर्यवृद्धि होती है ॥ ९ ॥ जब, गेहूँ, उड़द इनके तुष उतारि चूर्ण बना पीछे दूधमें और ईंखके रसमें मिला घृतमें ॥ १० ॥ पका उनको प्रातःकाल उठके खाये और उसके ऊपर पीपली, खांड इनसे युक्त दूधको पीवे ॥ ११ ॥ जवाखार, विदारीकंद, उडदोंका चूर्ण, जब, मिर्च, इनका चूर्ण बना मिश्री मिला पीछे पोली बना घृतमें सिद्ध करलेवे इन पोलियोंको ॥ १२ ॥ प्रातःकाल भक्षण करे और ऊपरसे दूध पीवे ऐसे करनेसे पुरुषोंका वीर्य बढता है और स्त्रीके संग बहुतसा रमण करता है ॥ १३ ॥ गिलोय, शतावरी, कौंचके बीज, खरेहटी ॥ १४ ॥ सेमर, मुसलीकी जड़ इनका चूर्ण बना गौके दूधके संग पीना श्रेष्ठ है और मनुष्योंकी इंद्रियमें वीर्यको बढानेवाला है ॥ १५ ॥ अथ विदार्यादि औषध । विदारिकन्दांशुमती बृहत्यौ काकोलिका भीरु पुनर्नवे द्वे ॥ शृङ्गाटकं मागधिका बला च चूर्णं सिताह्वं सितया प्रयोज्यम्॥ ॥१६॥जीर्णे पयः पायसमेव योज्यं करोति पुंसां बलमेवमो- जः॥स्त्रीणां सहस्रंभजतेऽपि षण्ढो मासद्वये प्रस्तुतमेव शस्तम् १७ विदारीकंद, शालवन, दोनों कटेहली, काकोली, शतावरी, दोनों प्रकारकी सांठी, सिंघाड़ा, पीपली, खरेहटी इनका चूर्ण बना मिश्री मिला ॥ १६ ॥ दूधके संग पीनेसे पुरुषोंके बल और वीर्य बढता है और हीजडा हो वहभी हजारों स्त्रियोंके संग रमणकर सकता है, दो महीनेतक इस औषधका सेवन श्रेष्ठ है ॥ १७ ॥ अथ शुक्रवृद्धिमें वर्ज्य । वर्जयेत्कटुकं चाम्लं तीक्ष्णं चोष्णं विदाहि च॥ रूक्षं वापि च सौवीरं प्रोक्तानि चेन्द्रियक्षतौ ॥१८॥ पलाण्डुयवनं कन्दांस्त- लान्माषान्यथाबलम् ॥ तथौदनं विशालीनां दुग्धं चेक्षुरसं तथा॥१९॥वास्तुकं चिलकानाञ्च पथ्ये शुक्रक्षयादपि॥वर्जित्वा सूरणं शुण्ठीं योगयुक्तो न योजयेत् ॥ २० ॥ इत्यात्रेयभा- षिते हारीतोत्तरे तृतीयस्थाने वाजीकरणं नाम सप्तचत्वा- रिंशोऽध्यायः ॥ ४७ ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu