विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ६ )
५९-भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा रुक्मिणीका हरण तथा यादववीरोंका जरासंध एवं शिशुपाल आदिके साथ घोर युद्ध .... ... ४४३
६०-श्रीकृष्णद्वारा रुक्मीकी पराजय तथा रुक्मिणी आदिके साथ श्रीकृष्णका विवाह एवं उनसे उत्पन्न हुई संतानोंका संक्षिप्त परिचय ... ४४८
६१-रुक्मीकी पुत्री शुभाङ्गीद्वारा स्वयंवरमें प्रद्युम्नका वरण, प्रद्युम्नपुत्र अनिरुद्धका रुक्मीकी पौत्री रुक्मवतीके साथ विवाह तथा बलरामद्वारा रुक्मीका वध ... ... ४५१
६२-बलदेवजीका माहात्म्य, उनके द्वारा हस्तिनापुरको गङ्गामें गिरानेका अद्भुत प्रयत्न ... ४५५
६३-नरकासुरका परिचय, द्वारकामें इन्द्रका आगमन और श्रीकृष्णसे नरकवधके लिये अनुरोध, सत्यभामासहित श्रीकृष्णका प्राग्ज्योतिषपुरमें गमन तथा उनके द्वारा मुरु, निसुन्द, हयग्रीव, विरूपाक्ष, पञ्चनाद, अन्यान्य असुर तथा नरकासुरका वध .... ४५६
६४-श्रीकृष्णका नरकासुरके भवनमें प्रवेश करके वहाँके धन-वैभव तथा सोलह हजार कुमारियोंको द्वारका भेजना और स्वयं देवलोकमें जा अदितिको कुण्डल दे वहाँसे पारिजात लेकर लौटना .... ४६५
६५-रैवतक पर्वतपर रुक्मिणीके व्रतोद्यापनका उत्सव, उसमें पारिजात-पुष्प देकर श्रीकृष्णद्वारा रुक्मिणीका सम्मान, नारदजीद्वारा रुक्मिणीके सर्वाधिक सौभाग्यकी प्रशंसा तथा सत्यभामाका कोपभवनमें प्रवेश .... .... ४६९
६६-श्रीकृष्णका सत्यभामाको मनाना और सत्यभामाका मानसिक खेद प्रकट करके उनसे तपस्याके लिये अनुमति माँगना .... ४७३
६७-श्रीकृष्णके पूछनेपर सत्यभामाका उन्हें अपने क्षोभ एवं खेदका कारण बताना, श्रीकृष्णका उनके लिये पारिजात वृक्ष लानेका विश्वास दिलाकर उन्हें संतुष्ट करना, सत्यभामा और श्रीकृष्णद्वारा नारदजीका सत्कार तथा नारदजीके द्वारा पारिजातकी उत्पत्ति और महिमाका वर्णन ४७७
६८-श्रीकृष्णका पारिजात वृक्ष माँगनेके लिये नारदजीके द्वारा इन्द्रके पास संदेश भेजना और न देनेपर उन्हें गदा मारनेकी धमकी देना .... ४८२
६९-स्वर्गमें महादेवजीकी परिचर्याके लिये नृत्य-गीत आदि उत्सव, नारदजीकी इन्द्रको श्रीकृष्णका पारिजातके लिये प्रार्थनाविषयक संदेश सुनाना और इन्द्रका अनेक कारण बताकर पारिजातको न देनेका विचार प्रकट करना .....४८५
७०-श्रीकृष्णके द्वारा गदा-प्रहारकी धमकी सुनकर कुपित हुए इन्द्रका नारदजीसे उनके बर्तावकी कटु आलोचना करना और युद्ध किये बिना पारिजात वृक्षको न देनेका ही निश्चय करना ... ४९०
७१-नारदजीके द्वारा श्रीकृष्णकी महत्ताका प्रतिपादन सुनकर भी इन्द्रका उन्हें पारिजात देनेको उद्यत न होना .... ... ४९४
७२-श्रीकृष्णका नारदजीको अमरावतीपर आक्रमण करनेका निश्चय बताकर इन्द्रके पास संदेश भेजना, इन्द्र और बृहस्पतिकी बातचीत, बृहस्पतिका कश्यपजीको यह समाचार बताना और कश्यपजीका युद्धकी शान्तिके लिये भगवान् शङ्करकी स्तुति करना ... ... ४९८
७३-इन्द्र और श्रीकृष्ण, जयन्त और प्रद्युम्न, प्रवर और सात्यकि तथा ऐरावत और गरुड़का युद्ध ५०५
७४-रात्रिमें युद्ध स्थगित करके श्रीकृष्णका पारियात्र पर्वतको वरदान देना, गङ्गाका स्मरण करना, बिल्व और गङ्गाजलपर महादेवजीका आवाहन करके उन विल्वोदकेश्वरकी पूजा और स्तुति करना, महादेवजीका उन्हें अभीष्ट वर देकर दैत्योंको मारनेका आदेश देना तथा पारियात्र पर्वतपर भगवान्का निवास एवं उनकी प्रतिमाके पूजनकी महिमा ... ... ५११