भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ

पृष्ठ 650, कुल 1169 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 650
६२८श्रीमहाभारते खिलभागे[ हरिवंशे

'प्राचीन कालमें इनके द्वारा खेदमें डाले जानेपर देवाधिदेव त्रिशूलधारी भगवान् शङ्करने इन्हें अनङ्ग बना दिया था (इनके शरीरको जलाकर भस्म कर दिया था)। आज दूसरे जन्ममें इनका मुझे दर्शन हुआ है॥ ११॥

कथमस्य स्तनं दास्ये मातृभावेन जानती।
भर्तुर्भार्थ्या त्वहं भूत्वा वक्ष्ये वा पुत्र इत्युत॥ १२॥

'जब मैं इस रहस्यको जानती हूँ, तब मातृभावसे इनके मुखमें अपना स्तन कैसे दूँगी। ये मेरे पति हैं, मैं इनकी पत्नी होकर इन्हें पुत्र कैसे कहूँगी'॥ १२॥

एवं संचिन्त्य मनसा धात्र्यास्तं सा समर्पयत्।
रसायनप्रयोगैश्च शीघ्रमेव व्यवर्धयत्॥ १३॥

मन-ही-मन ऐसा सोचकर मायावतीने बालक प्रद्युम्नको एक धायके हाथमें सौंप दिया तथा रसायनके प्रयोगोंसे उन्हें शीघ्र ही बड़ा कर दिया॥ १३॥

धात्र्याः सकाशात् स च तां शृण्वन् रुक्मिणिनन्दनः।
मायावतीमविज्ञानान्मेने स्वामेव मातरम्॥ १४॥

रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्न धायसे मायावतीकी प्रशंसा सुनकर उसे अनजानमें अपनी ही माता मानने लगे॥ १४॥

सा च तं वर्द्धयामास कार्ष्णिं कमललोचनम्।
मायाश्वास्मै ददौ सर्वा दानवीः काममोहिता॥ १५॥

मायावतीने कमलनयन श्रीकृष्ण-कुमारको जब बड़ा कर लिया, तब उनके प्रति कामभावसे मोहित होकर उन्हें समस्त दानवी मायाओंकी शिक्षा दे दी॥ १५॥

स यदा यौवनस्थस्तु प्रद्युम्नः कामदर्शनः।
चिकीर्षितज्ञो नारीणां सर्वास्त्रविधिपारगः॥ १६॥

प्रद्युम्न जब युवावस्थामें स्थित हुए, तब साक्षात् कामदेवके समान दिखायी देने लगे। वे स्त्रियोंके मनोभावोंके ज्ञाता और सम्पूर्ण अस्त्रोंके प्रयोगमें पारंगत थे॥ १६॥

तं सा मायावती कान्तं कामयामास कामिनी।
इङ्गितैश्चापि वीक्षन्ती प्रालोभयत सस्मिता।
प्रसञ्जन्तीं तु तां देवीं बभाषे चारुहासिनीम्॥ १७॥

उस समय मायावतीने कामवती नारीकी भाँति अपने उस प्रियतम पतिकी कामना की। वह मुसकराती हुई देखने और अपने हाव-भावोंसे उन्हें लुभाने लगी। उस मनोहर हासवाली देवी मायावतीको अपने प्रति आसक्त होती देख वे इस प्रकार बोले॥ १७॥

प्रद्युम्न उवाच
मातृभावं व्यतिक्रम्य किमेवं वर्तसेऽन्यथा।
अहो दुःस्वभावासि स्त्रीत्वे चपलमानसा॥ १८॥

प्रद्युम्नने कहा—अरी! तू मातृ-भावका उल्लङ्घन करके इस तरह विपरीत बर्ताव कैसे कर रही है? अहो! तू दुःशीला जान पड़ती है। तेरा चित्त अपने स्त्रीत्वको लेकर चञ्चल हो उठा है॥ १८॥

या पुत्रभावमुत्सृज्य मयि लोभात् प्रवर्तसे।
न तु तेऽहं सुतः सौम्ये कोऽयं शीलविपर्ययः॥ १९॥

तभी तो तू मेरे प्रति पुत्रभावका परित्याग करके कामलोभसे प्रेरित हो विपरीत बर्ताव कर रही है। इससे तो जान पड़ता है, मैं तेरा पुत्र नहीं हूँ। सौम्ये! तेरे शील-स्वभावमें यह उलट-फेर कैसा?॥ १९॥

तत्त्वमिच्छाम्यहं देवि कथितं को न्वयं विधिः।
विद्युत्सम्पातचपलः स्वभावः खलु योषिताम्॥ २०॥
या नरेषु प्रसज्जन्ते नगाग्रेषु घना इव।

देवि! मैं यथार्थ बात जानना चाहता हूँ, तू ठीक-ठीक बता दे कि तेरा यह व्यवहार कैसा है? निश्चय ही नारियोंका स्वभाव विद्युतपातके समान चपल होता है। जैसे बादल पर्वत-शिखरोंसे सक्त होते हैं, उसी तरह काममोहित स्त्रियाँ सभी पुरुषोंपर आसक्त हो जाती हैं॥ २० १/२॥

यदि तेऽहं सुतः सौम्ये यदि वा नात्मजः शुभे॥ २१॥
कथितं तत्त्वमिच्छामि किमिदं ते चिकीर्षितम्।

सौम्ये! शुभे! यदि मैं तेरा पुत्र होऊँ तो वह बता दे, अथवा यदि तेरा पुत्र न भी होऊँ तो वह भी बता दे। मैं तेरे मुखसे यथार्थ बात सुनना चाहता हूँ। तू यह क्या करना चाहती है॥ २१ १/२॥

एवमुक्ता तु सा भीरुः कामेन व्यथितेन्द्रिया॥ २२॥
प्रियं प्रोवाच वचनं विविक्ते केशवात्मजम्।
न त्वं मम सुतः कान्त नापि ते शम्बरः पिता॥ २३॥

उनके इस प्रकार पूछनेपर भीरूहृदया मायावती, जिसकी सारी इन्द्रियाँ कामसे व्यथित हो उठी थीं, एकान्तमें अपने प्रियतम केशवकुमारसे इस प्रकार बोली—'प्राणवल्लभ! तुम मेरे पुत्र नहीं हो और शम्बरासुर भी तुम्हारा पिता नहीं है॥ २२-२३॥

रूपवानसि विक्रान्तस्त्वं जात्या वृष्णिनन्दन।
पुत्रस्त्वं वासुदेवस्य रुक्मिण्यानन्दवर्धनः॥ २४॥

'वृष्णिकुलनन्दन! तुम जन्मसे ही रूपवान् और पराक्रमी हो। वसुदेवनन्दन श्रीकृष्णके पुत्र हो और माता रुक्मिणीका आनन्द बढ़ानेवाले उनके लाड़ले लाल हो॥ २४॥

दिवसे सप्तमे बालो जातमात्रोऽपवाहितः।
सूतिकागारमध्यात् त्वं शिशुरुत्तानशायितः॥ २५॥
मम भर्त्ता हतोऽसि त्वं बलवीर्यप्रवर्तिना।
पितुस्ते वासुदेवस्य धर्षयित्वा गृहं महत्॥ २६॥

'तुम्हारे जन्मके सातवें दिन जब कि तुम बालशिशुके रूपमे शय्यापर उत्तान सुलाये गये थे, मेरा भरण-पोषण करने-