विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
पृष्ठ 8, कुल 1169 में से
संदर्भ में पढ़ें( २ )
२५-चन्द्रमाकी उत्पत्ति और राजसूय यज्ञ, देवासुर-संग्राम तथा बुधकी उत्पत्ति ... ८६
२६-महाराज पुरूरवाके चरित्र और वंशका वर्णन, राजा पुरूरवाका त्रेताग्निकी रचना करना और गन्धर्वोंके लोकमें जाना ... ८९
२७-पुरूरवाके द्वितीय पुत्र अमावसुके वंशका वर्णन, विश्वामित्र और परशुरामकी उत्पत्ति ... ९२
२८-राजा रजि और उनके पुत्रोंका चरित्र, इन्द्रका अपने स्थानसे भ्रष्ट होकर पुनः उसपर प्रतिष्ठित होना ... ९६
२९-अनेनाके वंशका वर्णन, धन्वन्तरिका काशिराज धन्वके यहाँ पुत्ररूपमें अवतार, दिवोदासके राज्य-कालमें भगवान् शिवकी आज्ञासे गणेश्वर निकुम्भके द्वारा वाराणसीको जनशून्य बनानेका प्रयत्न, वहाँ शिव और पार्वतीका निवास, दिवोदासका वाराणसीपर अधिकार और अलर्क-की प्रशंसा ... ९९
३०-नहुष एवं ययातिके वंशका वर्णन तथा ययातिका चरित्र ... १०४
३१-पूरुकी वंशपरम्पराका वर्णन ... १०८
३२-पूरुके वंशके अन्तर्गत ऋचेयुकी वंशपरम्परा—अजमीढवंश, पाञ्चाल एवं सोमकवंश, कौरववंश तथा तुर्वसु द्रुह्यु और अनुकी संततिका वर्णन ... १११
३३-यदुवंशका वर्णन, कार्तवीर्यकी उत्पत्ति एवं चरित्र तथा पाँचों ययाति-पुत्रोंके वंश-वर्णनके श्रवणकी महिमा .... ११७
३४-वृष्णिवंशका वर्णन—अक्रूर, वसुदेव, कुन्ती, सात्यकि, उद्धव, चारुदेष्ण, एकलव्य आदिका परिचय ... १२१
३५-श्रीकृष्णका अवतार लेना, श्रीकृष्णके अन्य भाई-बहिनों और कुटुम्बियोंका वर्णन तथा काल-यवनकी उत्पत्ति .... १२४
३६-क्रोष्टाके वंशका वर्णन, पुरोहितके गोत्रसे क्षत्रियों-के गोत्रका बदल जाना ... १२६
३७-बभ्रुवंशका वर्णन ... १२८
३८-मजमानके वंशका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा .... १३१
३९-स्यमन्तकमणिके कारण प्रसेन, सत्राजित् और शतधन्वाका मारा जाना, बलदेवजीका दुर्योधनको गदा-विद्या सिखाना, अक्रूरजीका श्रीकृष्णको मणि देना और श्रीकृष्णका पुनः अक्रूरको मणि लौटा देना .... १३५
४०-जनमेजयका भगवान्के वराह, नृसिंह, परशु-राम, श्रीकृष्ण आदि अवतारोंका रहस्य पूछना ... १३८
४१-भगवान् विष्णुके वाराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण, व्यास तथा कल्कि-अवतारोंकी संक्षिप्त कथा ... १४५
४२-भगवान् विष्णुके ईश्वरत्वका वर्णन एवं अद्भुत तारकामय संग्रामकी कथा ... १५३
४३-देवताओंके साथ युद्धके लिये उद्यत हुई दैत्य-सेनाका वर्णन .... १५९
४४-आश्चर्यतारकामय संग्राममें देवसेनाकी युद्धके लिये तैयारी ... १६१
४५-देवासुर-संग्राम एवं और्व अग्निकी उत्पत्ति १६५
४६-इन्द्रद्वारा चन्द्रमाकी स्तुति, चन्द्रदेव और वरुण-देवके द्वारा दैत्य-सेनाका संहार, मयदानवद्वारा मायाका प्रयोग, पवन और अग्निदेवका दैत्य-सेना-के साथ संग्राम और कालनेमिका रणमें आगमन १७०
४७-कालनेमिका युद्ध और प्रभाव .... १७५
४८-कालनेमि और भगवान् विष्णुका संवाद, श्री-विष्णुद्वारा कालनेमिका वध तथा देवताओंको आश्वासन देकर ब्रह्मलोकको प्रस्थान .... १७९
४९-ब्रह्मलोकमें भगवान् विष्णुका सत्कार ... १८४
५०-नारायणाश्रममें भगवान् विष्णुका शयन और उत्थान तथा पास आये हुए ब्रह्मा आदि देवताओंसे उनके आगमनका प्रयोजन पूछना १८७
५१-ब्रह्माजीका भगवान् विष्णुसे जगत्की वर्तमान अवस्थाका वर्णन करते हुए पृथ्वीका भार उतारनेके लिये मन्त्रणा करनेका अनुरोध ... १९१