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हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट द्वारा

DevanagariHindipublished184 पृष्ठ

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( १४ ) बाण के समकालीन कवियों में मातंगदिवाकर और मयूर का उल्लेख आता है । अनुश्रुति के अनुसार मयूर जिन्होंने सूर्यशतक का निर्माण किया है, बाण के श्यालक बताये जाते हैं । बाण ने अपने विवाह का उल्लेख सम्राट् हर्ष से मिलने के प्रसंग में ही किया है—'दारपरिग्रहादभ्यागारिकोऽस्मि।' इसके अतिरिक्त उनके वैवाहिक जीवन के सम्बन्ध में कोई प्रामाणिक तथ्य प्राप्त नहीं है । बाण की रचनाएँ बाण की प्रामाणिक रचनाओं में हर्षचरित और कादम्बरी के अतिरिक्त कोई दूसरी नहीं है । यों तो उनके नाम पर कई अन्य रचनाओं का भी उल्लेख आता है । चण्डीशतक बाण का निर्मित समझा जाता है । इसमें १०० श्लोकों में बाण ने भगवती दुर्गा की स्तुति की है । पार्वती-परिणय नाटक को भी कुछ लोगों ने बाण ही का निर्माण समझा था । परन्तु कीथ ने स्पष्ट कर दिया कि यह नाटक १५ वीं शताब्दी के कवि वामनभट्ट बाण की रचना है । वामनभट्ट बाण तैलंगदेशीय वत्सगोत्री ब्राह्मण थे । नलचम्पू के टीकाकार चण्डपाल और गुणविनयगणि के अनुसार बाण ने मुकुटताड़ितक नाटक की भी रचना की थी, पर यह ग्रन्थ अभी तक उपलब्ध नहीं हुआ है । जहाँ तक बाण की शैली और कल्पना का क्षेत्र है उसकी भूमिका में बाण के हर्षचरित और कादम्बरी के अतिरिक्त ये अन्य कृतियाँ किसी अंश में भी संगत नहीं बैठतीं । अतः प्रामाणिक तथ्य के अभाव में यह मान लेना ही ठीक है कि इन दोनों के अतिरिक्त बाण की कोई अन्य रचना नहीं है । हर्षचरित हर्षचरित एक आख्यायिका है । बाण ने ग्रन्थ के आरम्भ में स्वयं कहा है—'करोम्या- ख्यायिकाम्भोधौ जिह्वाप्लवनचापलम्' ( श्लोक २० ) । आचार्यों ने आख्यायिका का जो स्वरूप निर्धारित किया है उसका समन्वय विशेष रूप से हर्षचरित में मिल जाता है । प्रसंगतः हम कथा और आख्यायिका के भेद की चर्चा करेंगे । हर्षचरित एक ऐतिहासिक काव्य है । यह कहा जा सकता है कि संस्कृत-साहित्य में ऐतिहासिक काव्य लिखने का शुभारम्भ बाण के द्वारा ही हुआ । प्राचीन कवि ऐतिहासिक पुरुषों के चरित को लेकर काव्य का निर्माण करने में सम्भवतः अपनी हीनता समझते थे । सामान्य व्यक्ति को काव्य का नायक बनाकर लिखना उनके विचार में शोभन न था । बाण ने हर्षचरित लिख कर इस कलङ्क को मिटाने का प्रथम प्रयास किया । आगे चलकर कई ऐतिहासिक पुरुषों के जीवनवृत्त पर कवियों ने अनेक चरित-काव्य लिखे । हर्षचरित आठ उच्छ्वासों में विभक्त है । प्रथम सवा दो उच्छ्वासों में बाण ने आत्मकथा लिखी है और शेष में सम्राट् हर्षवर्धन का चरित है । आरम्भ हर्ष के वंश-प्रवर्तक पुष्पभूति के वर्णन से किया