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हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट द्वारा

DevanagariHindipublished184 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

( २६ ) है जो सिर्फ प्रणय करना जानती है, महाश्वेता तपी हुई वनिता है जो प्रणय के सच्चे मार्ग पर कादम्बरी को प्रतिष्ठित करने में सहायक होती है। कादम्बरी से महाश्वेता का व्यक्तित्व किसी अंश में दुर्बल नहीं। इसका यह अर्थ नहीं कि कादम्बरी बिलकुल एक कठपुतली रह गई है। वह सबके प्रभाव से अलग होकर अपने प्रणय का अस्तित्व बनाने में अत्यन्त निपुण है। आरम्भ में उसका वासना-जनित प्रेम भी आगे चल कर विरह-तप्त होकर महाश्वेता के प्रणय के समान ही पवित्र बन गया। आरम्भ से अन्त तक कादम्बरी कथा अनेक प्रकार की विविधतापूर्ण घटनाओं से भरी होने के कारण कवि के वस्तुविन्यास- कौशल का परिचय देती है। बाण के चरित्र की अपनी विशेषता है। जैसा कि हम हर्षचरित में देख चुके हैं, उसी प्रकार कादम्बरी के भी सभी पात्र सजीव बन पड़े हैं। नवयुवक चन्द्रापीड जो अपनी सौम्यता में, महाराज तारापीड जो अपनी उदारता में, आदर्श महामन्त्री शुकनास जो अपनी अगाध प्रवीणता में, रानी विलासवती जो अपनी सुकुमारता में, छाया की भाँति चन्द्रापीड का अनुसरण करने वाली पत्रलेखा अपनी तत्परता में, कठोर कपिंजल अपनी स्नेहमयता में कादम्बरी के जीते-जागते पात्र हैं जो पाठक के मन पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। कादम्बरी के चित्रण में बाण ने भावों के सम्बन्ध में अपने मार्मिक निरीक्षण का अपूर्व परिचय दिया है। कादम्बरी के समस्त भाव सहृदय और समीक्षक पाठक के लिए अलग से अध्ययन के विषय हैं। बाण के मौलिक कवित्व का साक्षात्कार इन्हीं विषयों में होता है।

वर्णन-वैचित्र्य कल्पनाओं का अतिरंजित हो जाना बाण जैसे कल्पनाशील मन वाले भावुकहृदय कवि के लिए कोई आश्चर्यजनक नहीं। सबसे बड़ी बात तो यह दृष्टि में आती है कि बाण ने अपने बहुमुखी जीवन के अनुभवों को समेट कर पद-पद में अनुस्यूत कर डाला है। हर्षचरित में बाण की दृष्टि के सामने उनके जो समस्त अनुभव थे, कादम्बरी में वे ही बिलकुल उनके तरल मानस से अन्तर्लीन होकर कुछ विलक्षण रूप में प्रस्फुरित होते हैं। जैसे कोई चित्रकार किसी प्रपात के मनोहर दृश्य के सामने बैठ कर उसका रेखाचित्र बना लेता है और घर पर जाकर आँखों के मार्ग से मन में उतारे हुए उस हृदय के समस्त छविमय आकार को विविध प्रकार के रंगों से अभिव्यंजित करता है, ठीक उसी प्रकार बाण ने अभ्यास के लिए अनुभव के विविध रूपों का एक खाका तैयार कर लिया, जो हर्षचरित के रूप में सहृदय जनों के सामने है। फिर वे ही अनुभव नये-नये रंगरूप में अलौकिकता के साथ कादम्बरी के पद-पद में बीन गए हैं। यही कारण है कि कवि की सफलता हर्ष- चरित की अपेक्षा कादम्बरी में अधिक समझी जाती है। हर्षचरित में जो सेनापति सिंहनाद का उपदेश है उसकी कोटि में कादम्बरी का शुकनासोपदेश कितना विस्तृत और