हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 101, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज में ऐसा विचार करते हैं। खून करके जो लोग राज करेंगे, वे प्रजा को सुखी नहीं बना सकेंगे। धींगड़ा ने जो खून किया है उससे या जो खून तमाम हिन्दुस्तानियों को हिन्दुस्तान में हुए हैं उनसे देश को फायदा हुआ हथियारबंद करना तो है, ऐसा अगर कोई मानता हो तो वह बड़ी हिन्दुस्तान को यूरोप सा भूल करता है। धींगड़ा को मैं देशाभिमानी मानता बनाने जैसा होगा। अगर हूँ, लेकिन उसका देश प्रेम पागलपन से भरा ऐसा हुआ तो आज यूरोप था। उसने अपने शरीर का बलिदान गलत तरीके के जो बेहाल हैं वैसे ही से दिया। उससे अंत में तो देश को नुकसान ही हिन्दुस्तान के भी होंगे। होने वाला है। थोड़े में हिन्दुस्तान को पाठक : लेकिन आपको इतना तो कुबूल करना यूरोप की सभ्यता अपनानी ही होगा कि अंग्रेज इस खून से डर गये हैं और होगी। ऐसा ही होने वाला लॉर्ड मॉर्ले ने जो कुछ हमें दिया है वह ऐसे डर से हो तो अच्छी बात यह होगी ही दिया है। कि जो अंग्रेज उस सभ्यता संपादक : अंग्रेज जैसे डरपोक प्रजा हैं वैसे में कुशल हैं। बहादुर भी हैं। गोला-बारूद का असर उन पर तुरन्त होता है, ऐसा मैं मानता हूँ। संभव है, लॉर्ड मॉर्ले ने हमें जो कुछ दिया वह डर से दिया हो, लेकिन डर से मिली हुई चीज जब तक डर बना रहता है तभी तक टिक सकती है। 100