भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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हिन्द स्वराज वाले तो हम अंग्रेजी जानने वाले लोग ही हैं। राष्ट्र की हाय अंग्रेजों पर नहीं पड़ेगी, बल्कि हम पर पड़ेगी। लेकिन मैंने आपसे कहा कि मेरा जवाब 'हाँ' और 'ना' दोनों है। 'हाँ' कैसे सो मैंने आपको समझाया। अब 'ना' कैसे यह बताता हूँ। हम सभ्यता के रोग में ऐसे फँस गये हैं कि अंग्रेजी शिक्षा अंग्रेजी शिक्षा लेकर हमने अपने बिल्कुल लिये बिना अपना काम चला सकें राष्ट्र को गुलाम बनाया है। ऐसा समय अब नहीं रहा। जिसने वह शिक्षा अंग्रेजी शिक्षा से दंभ, राग, पाई है, वह उसका अच्छा उपयोग करे। जुल्म वगैरह बढ़े हैं। अंग्रेजी अंग्रेजों के साथ के व्यवहार में, ऐसे शिक्षा पाए हुए लोगों ने प्रजा हिन्दुस्तानियों के साथ के व्यवहार में को ठगने में, उसे परेशान करने जिनकी भाषा हम समझ न सकते हों और में कुछ भी कसर नहीं छोड़ अंग्रेज खुद अपनी सभ्यता से कैसे परेशान रखी है। अब अगर हम अंग्रेजी हो गये हैं यह समझने के लिए अंग्रेजी का शिक्षा पाए हुए लोग उसके लिए उपयोग किया जाए। जो लोग अंग्रेजी पढ़े कुछ करते हैं, तो उसका हम पर हुए हैं उनकी संतानों को पहले तो नीति जो कर्ज चढ़ा हुआ है उसका सिखानी चाहिए, उनकी मातृभाषा सिखानी कुछ हिस्सा ही हम अदा करते हैं। चाहिए और हिन्दुस्तान की एक दूसरी भाषा यह क्या कम जुल्म की बात है सिखानी चाहिए। कि अपने देश में अगर मुझे बालक जब पक्की उम्र के हो जाएँ तब इन्साफ़ पाना हो तो मुझे अंग्रेजी भले ही वे अंग्रेजी शिक्षा पाएँ और वह भी भाषा का उपयोग करना चाहिए। उसे मिटाने के इरादे से, न कि उसके जरिये बैरिस्टर होने पर मैं स्वभाषा में पैसे कमाने के इरादे से। ऐसा करते हुए भी बोल ही नहीं सकता! हमें यह सोचना होगा कि अंग्रेजी में क्या सीखना चाहिए और क्या नहीं सीखना चाहिए। कौन से शास्त्र पढ़ने चाहिए, यह भी हमें सोचना होगा। थोड़ा विचार करने से ही हमारी समझ में आ जाएगा कि अगर अंग्रेजी डिग्री लेना हम बन्द कर दें, तो अंग्रेज हाकिम चौंकेंगे। पाठक : तब कैसी शिक्षा दी जाए ? संपादक : उसका जवाब ऊपर कुछ हद तक आ गया है। फिर भी इस सवाल पर हम और विचार करें। मुझे तो लगता है कि हमें अपनी सभी भाषाओं को 130