भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 150 में से

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कांग्रेस और उसके कर्ता-धर्ता पाठक : आजकल हिंदुस्तान में स्वराज्य की हवा चल रही है। सब हिंदुस्तानी आज़ाद होने के लिए तरस रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में भी वही जोश दिखाई दे रहा है। हिंदुस्तानियों में अपने हक पाने की बड़ी हिम्मत आई हुई मालूम होती है। इस बारे में क्या आप अपने ख़्याल बताएंगे ? संपादक : आपने सवाल ठीक पूछा है, लेकिन इसका जवाब देना आसान बात नहीं है। अखबार का एक काम तो है लोगों की भावनाएँ जानना और उन्हें ज़ाहिर करना, दूसरा काम है लोगों में अमुक ज़रूरी भावनाएँ पैदा करना और तीसरा काम अगर दूसरे की इज़्ज़त है लोगों में दोष हों तो चाहे जितनी मुसीबतें आने करने की आदत हम खो पर बेधड़क होकर उन्हें दिखाना। आपके सवाल का बैठें, तो हम निकम्मे हो जवाब देने में ये तीनों काम साथ-साथ आ जाते हैं। जाएँगे। जो प्रौढ़ और लोगों की भावनाएँ कुछ हद तक बतानी होंगी, न तजरबेकार हैं, वे ही हों वैसी भावनाएँ उनमें पैदा करने की कोशिश स्वराज्य भुगत सकते हैं, करनी होगी और उनके दोषों की निंदा भी करनी न कि बे-लगाम लोग। होगी। फिर भी आपने सवाल किया है, इसलिए उसका जवाब देना मेरा फर्ज मालूम होता है। पाठक : क्या स्वराज्य की भावना हिन्द में पैदा हुई आप देखते हैं ? संपादक : वह तो जबसे नेशनल कांग्रेस कायम हुई तभी से देखने में आई है। 'नेशनल' शब्द का अर्थ ही वह विचार जाहिर करता है। पाठक : यह तो आपने ठीक नहीं कहा। नौजवान हिन्दुस्तानी आज कांग्रेस की परवाह ही नहीं करते। वे तो उसे अंग्रेजों का राज्य निभाने का साधन मानते हैं। संपादक : नौजवानों का ऐसा ख़्याल ठीक नहीं है। हिन्द के दादा दादाभाई नौरोजी ने ज़मीन तैयार नहीं की होती तो नौजवान आज जो बातें कर रहे हैं वह भी नहीं कर पाते। मि. ह्यूम ने जो लेख लिखे, जो फटकारें हमें सुनाईं, जिस जोश से हमें जगाया, उसे कैसे भुलाया जाए ? सर विलियम वेडरबर्न ने 13

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