हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
DevanagariHindipublished150 पृष्ठ
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भविष्य में लोग इस आधार पर हमारा मूल्यांकन नहीं करेंगे कि हम किस सिद्धांत का दावा करते हैं या कौन सा 'लेबल' धारण करते हैं या कौन से नारे लगाते हैं, हमारा मूल्यांकन वे हमारे उद्यम, त्याग, ईमानदारी और चरित्र की शुद्धता से करेंगे। वे जानना चाहेंगे कि हमने वास्तव में उनके लिए क्या किया है। लेकिन अगर आप नहीं सुनेंगे, अगर आप लोगों के मौजूदा दुःख और असंतोष से लाभ उठाकर उसे दलीय स्वार्थों के लिए बढ़ाएंगे और उसका दुरुपयोग करेंगे, तो यह दुःख और असंतोष पलट कर आपके ही सिर पर पड़ेगा और जनता से इस विश्वासघात के लिए ईश्वर भी आपको क्षमा नहीं करेगा।